नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल की रामसर साइट बड़ा तालाब के संरक्षण पर सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरणीय उल्लंघनों के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भारत भवन ट्रस्ट को मामले में पक्षकार बनाया और छह सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया। याचिका में भोज वेटलैंड के 50 मीटर बफर जोन में 2002 से ब्लास्टिंग, अवैध खुदाई और पेड़ों की कटाई जैसे नियमों के विपरीत गतिविधियों का आरोप है, जिससे झील के जलग्रहण क्षेत्र और जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल सेंट्रल जोन बेंच ने कोलार रोड स्थित अकबरपुर बाघ भ्रमण क्षेत्र में अवैध खुदाई, पहाड़ी कटान और पेड़ों की कटाई के मामले में सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने नवदुनिया में प्रकाशित एक समाचार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए और मध्यप्रदेश शासन, भोपाल कलेक्टर, नगर निगम, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए हैं। आरोप है कि सरकारी भूमि पर मशीनों से खुदाई कर पहाड़ी को समतल किया जा रहा था, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। एक दो सदस्यीय समिति को छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल के शाहपुरा तालाब और उसके बफर जोन के सीमांकन तथा अतिक्रमणों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने तालाब किनारे पड़े डीसिल्टिंग के मलबे को एक सप्ताह के भीतर हटाने का भी आदेश दिया है। नगर निगम, कलेक्टर और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन सप्ताह में एनजीटी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। एनजीटी ने ‘नईदुनिया’ की एक रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए अतिक्रमण, जल गुणवत्ता और बिना शोधित गंदे पानी के प्रवाह जैसे मुद्दों पर सुनवाई की।