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एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन ने उपशामक देखभाल सेवाओं हेतु समझौता किया

एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन ने गंभीर और जीवन-सीमित बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर तथा सम्मानजनक उपशामक देखभाल प्रदान करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत भोपाल सहित मध्य भारत में उपशामक देखभाल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। इसमें मरीजों को दर्द से राहत, मानसिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान करना शामिल है। एम्स भोपाल की उपशामक देखभाल इकाई के प्रभारी डॉ. अनुज जैन के अनुसार, समझौते से आम लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही, घर पर उपशामक देखभाल की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को बार-बार अस्पताल नहीं आना पड़ेगा।

एम्स भोपाल ने एमडीआर-टीबी दवा प्रतिरोध जांच के लिए दो-दिवसीय टेस्ट विकसित किया

एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने एमडीआर-टीबी के लिए एक नया जीनोटाइप एमटीबीडीआरएसएल टेस्ट विकसित किया है, जो दवा प्रतिरोध का पता सिर्फ दो दिन में लगा सकता है। पहले इसमें 4-6 सप्ताह लगते थे, जिससे अनुमान के आधार पर उपचार शुरू करने का जोखिम रहता था। इस टेस्ट से मरीजों को सही दवा के साथ जल्द इलाज मिल पाएगा। अध्ययन में 74 एमडीआर-टीबी मरीजों पर यह परीक्षण किया गया, जिसमें 19% में फ्लोरोक्विनोलोन दवा के प्रति प्रतिरोध पाया गया, जिसका कारण टीबी के कीटाणु के जीआर-ए जीन में बदलाव था। डॉ. आनंद कुमार मौर्य ने इस टेस्ट को सरकारी टीबी कार्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है, जिससे गरीब मरीजों को भी लाभ मिल सके।

एम्स भोपाल और डीआरडीओ सैनिकों के लिए नई तकनीक विकसित करेंगे

एम्स भोपाल और डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला डीआईपीएएस ने देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए हाथ मिलाया है। यह समझौता स्वदेशी तकनीकों और चिकित्सा समाधानों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे सियाचिन, लद्दाख, ऊंचे पहाड़ों और युद्ध क्षेत्र में तैनात जवानों को सीधा लाभ मिलेगा। शोध में सैनिकों पर अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और तनाव के प्रभावों का अध्ययन कर ऐसे उपाय विकसित किए जाएंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़े। परियोजना में पहनने योग्य स्मार्ट उपकरण भी बनाए जाएंगे। यह पहल विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करेगी और इसके लाभ आम मरीजों को भी मिलेंगे।