ग्वालियर पुलिस ने आंध्र प्रदेश के नक्सल प्रभावित जंगल में सात दिनों के विशेष ऑपरेशन में अंतरराज्यीय गांजा तस्कर सुभाष चंद्र पांगी को गिरफ्तार किया। पुलिसकर्मी चरवाहा और मजदूर बनकर रहे और तेलुगु सीखी। डीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। पांगी को आजीवन कारावास की सजा हुई है, जिससे ग्वालियर, आगरा, दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में गांजा सप्लाई का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हो गया। पुलिस ने यह भी बताया कि अब नशा तस्करों के मुख्य निशाने पर स्कूल और कॉलेज के छात्र हैं।
जापान के टोट्टोरी प्रांत के मुख्य सचिव तोशिकी एंडो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा का दौरा किया। इस दौरान कौशल विकास, पर्यटन, निवेश, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दो दिवसीय दौरे में प्रस्तावित ओडिशा-टोट्टोरी मैत्री समझौते पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसका उद्देश्य दोनों सरकारों के बीच सहयोग को औपचारिक बनाना है। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने जापानी कंपनियों को ओडिशा के औद्योगिक, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा, पर्यटन और एमएसएमई क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
झारखंड के धनबाद जिले में मंगलवार शाम को एक करोड़ रुपये से अधिक के इनामी टॉप माओवादी मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया गया, जो कई राज्यों में वांछित था। इस अभियान में दो अन्य माओवादी भी पकड़े गए। इसी दिन 16 माओवादियों ने झारखंड पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 39 लाख रुपये के इनामी छह माओवादी और 128 मामलों में वांछित संतोष महतो शामिल थे। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 3 अगस्त से ओडिशा के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगी, जहां वह विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी और भुवनेश्वर से बरहमपुर तक ट्रेन से यात्रा करेंगी। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने दौरे की तैयारियों की समीक्षा की है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज को चुनौती दी गई थी। फिल्म को सीबीएफसी से मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन ओडिशा सरकार ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी। एक अन्य मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह याचिका संविधान की दसवीं अनुसूची की उस व्याख्या को चुनौती देती है जो विधायकों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए पार्टी विलय का रास्ता अपनाने की अनुमति देती है।