मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई में 50% आरक्षण सीमा पर बहस ने नया मोड़ लिया। ओबीसी पक्ष ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पहले लागू होने का हवाला देते हुए 50% सीमा पार करने के लिए केवल ओबीसी आरक्षण को जिम्मेदार ठहराने पर आपत्ति जताई। सरकार की दलीलों, विशेषकर पुराने आंकड़ों के उपयोग और नए डेटा की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 87-13% भर्ती फार्मूले पर सुनवाई 27% ओबीसी आरक्षण की वैधता पर बहस पूरी होने के बाद होगी। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को दोपहर 2.30 बजे निर्धारित है।
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने पांच साल बाद उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने पर लगी रोक हटा दी है। यह निर्णय विगत वर्षों और 2023 के विशाल छात्र आंदोलनों के बाद लिया गया है। आयोग नवंबर से राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2019 से 2024 तक की उत्तर पुस्तिकाएं दिखाएगा। ओबीसी आरक्षण विवाद के कारण, शुरुआत में 87% अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा, जबकि 13% को न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा। आयोग ने 2025 और 2026 की मुख्य परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं भी दिखाने का ऐलान किया है।
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई आज निर्धारित थी, लेकिन न्यायमूर्ति विनय सराफ की अनुपलब्धता के कारण अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे होगी। पिछली सुनवाई में, प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया था कि 51% आबादी के बावजूद उन्हें लंबे समय तक केवल 14% आरक्षण मिला, जबकि अन्य वर्गों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिक आरक्षण प्राप्त है। सरकार अभी तक आरक्षण के आधार को स्पष्ट नहीं कर पाई है।
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान नया मोड़ आया है। सामान्य वर्ग के बाद अब अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग ने भी बढ़े हुए आरक्षण का विरोध किया है। एसटी पक्ष ने तर्क दिया कि इससे सामान्य मेरिट की सीटें कम होंगी और उनके अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित होंगे। हाई कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि जब एसटी की आरक्षित सीटें रिक्त रहती हैं, तो ओबीसी आरक्षण को भेदभाव कैसे माना जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।