टोरेंट ग्रुप मध्य प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में 43 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जिससे 15 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को अहमदाबाद में टोरेंट ग्रुप के चेयरमैन समीर मेहता से भेंट के बाद यह घोषणा की। प्रमुख परियोजनाओं में अनूपपुर में 1,600 मेगावाट ताप विद्युत संयंत्र (₹22,000 करोड़, 7,000 रोजगार) और छिंदवाड़ा में 1,500 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज परियोजना (₹7,500 करोड़, 4,000 रोजगार) शामिल हैं। राज्य सरकार ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,800 मेगावाट ताप विद्युत क्षमता निविदा में टोरेंट पावर को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
राजधानी भोपाल के आसपास औद्योगिक गतिविधियों का व्यापक विस्तार हो रहा है। भोपाल सहित रायसेन, सीहोर, राजगढ़ और नर्मदापुरम के 50 किलोमीटर के दायरे में 88 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा चुके हैं और 51 नए औद्योगिक क्षेत्र निर्माणाधीन हैं। इस पहल से पारंपरिक भारी उद्योगों पर निर्भरता कम हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। तीन नए औद्योगिक हब – बैरसिया, सतगढ़ी और बड़वई – लगभग 11,000 युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों का भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
जबलपुर नगर निगम द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों में संपत्ति कर वसूली के प्रयासों में तेजी आने के बाद उद्योगपतियों में रोष बढ़ गया है। महाकौशल उद्योग संघ ने एक बैठक में संपत्ति कर का भुगतान न करने और पिछले वर्ष जमा किए गए कर की वापसी की मांग करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। संघ ने नगर निगम की वादाखिलाफी और अवैधानिक वसूली के प्रयासों का विरोध करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का संकल्प लिया है। स्थायी समाधान के लिए भोपाल में उच्चाधिकारियों से मुलाकात करने की भी योजना है।
जापान के टोट्टोरी प्रांत के मुख्य सचिव तोशिकी एंडो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा का दौरा किया। इस दौरान कौशल विकास, पर्यटन, निवेश, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दो दिवसीय दौरे में प्रस्तावित ओडिशा-टोट्टोरी मैत्री समझौते पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसका उद्देश्य दोनों सरकारों के बीच सहयोग को औपचारिक बनाना है। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने जापानी कंपनियों को ओडिशा के औद्योगिक, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा, पर्यटन और एमएसएमई क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
इंदौर के मालीखेड़ा गांव में 10 एकड़ भूमि पर बहुमंजिला इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की तैयारी चल रही है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है, जिसके लिए राजस्व विभाग से जमीन मिली है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग ने विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी है, जिसे 15 दिनों में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस पार्क में भूखंडों के बजाय बहुमंजिला भवनों में ब्लॉक बनाकर लघु और मध्यम उद्योगों को स्थापित किया जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। विभाग पोलोग्राउंड में भी बहुमंजिला भवनों का प्रयोग कर रहा है, और सनावदिया में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।
ग्वालियर-चंबल अंचल में ₹12000 करोड़ के निजी निवेश से टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार इस परियोजना में ₹1000-1500 करोड़ का प्रारंभिक निवेश कर रही है। साडा क्षेत्र के कुलैथ और सौजना में बनने वाला यह जोन 5जी, 6जी टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर चिप्स, स्मार्टफोन्स और ऑप्टिकल फाइबर उपकरणों के निर्माण व रिसर्च का केंद्र बनेगा। यह मध्य प्रदेश का पहला और देश का पांचवां ऐसा जोन होगा, जिससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 5000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने विधानसभा में बताया कि 10 वर्ष से अधिक का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों पर संविलियन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 जनवरी 2026 को इसकी घोषणा की थी। संविदा कर्मियों को ग्रेच्युटी, अंशदायी पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अनुकंपा नियुक्ति जैसे लाभ मिलेंगे, साथ ही महिला संविदाकर्मी प्रसूति अवकाश की पात्र होंगी। हालांकि, चाइल्ड केयर लीव का प्रविधान नहीं है। विधायक अनुभा मुंजारे ने प्रक्रिया में देरी पर चिंता व्यक्त की थी।
मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ विधेयक पारित कर दिया। इसका उद्देश्य उद्योगों को समय पर मंजूरी दिलाना और सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। विधेयक के तहत राज्य में एक ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सचिवालय’ स्थापित होगा, जो उद्योगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करेगा। राज्य और जिला स्तर पर निवेश प्रोत्साहन समितियों का गठन भी होगा। मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआईडीसी) नोडल एजेंसी होगी। व्हाइट और ग्रीन श्रेणी के उद्योगों को स्व-घोषणा पर स्थापना प्रमाणपत्र मिलेगा, जिससे वे काम शुरू कर सकेंगे। हालांकि, जनस्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी निरीक्षण जारी रहेंगे।