केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सूचित किया है कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बायोमेडिकल कचरे के ‘डीप बरीअल’ निपटान नियमों का पालन नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 9,178 में से केवल 5,715 स्वास्थ्य केंद्र ही मानकों के अनुरूप पाए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सभी संबंधित केंद्र शामिल हैं। सीपीसीबी ने उल्लंघन करने वाले राज्यों को आठ सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई हो सकती है। एनजीटी ने सीपीसीबी को अगली सुनवाई, जो 28 अक्तूबर 2026 को है, से पहले प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इंदौर के राजेंद्र नगर स्थित रावेरकर परिवार का दो किलो वजनी चांदी का पुश्तैनी कलश गलती से घर के कचरे के साथ नगर निगम के वाहन में चला गया था। परिवार को देर शाम इसका पता चला, जिसके बाद उन्होंने वार्ड 80 के पार्षद प्रशांत बड़वे से मदद मांगी। पार्षद की सूचना पर निगमकर्मियों ने ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित नेप्रा प्लांट में लगभग 24 घंटे की तलाश के बाद शनिवार सुबह कलश को ढूंढ निकाला और परिवार को लौटाया। रविवार को रहवासियों ने निगमकर्मियों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया।