संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ ने राज्य सरकार से ऊर्जा विभाग की तर्ज पर सभी विभागों में संविदाकर्मियों के नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग की है। ऊर्जा विभाग में लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को विभागीय पात्रता परीक्षा के माध्यम से नियमित करने की योजना है, जिसमें लगभग 6,000 पद आरक्षित किए गए हैं। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने इस संबंध में राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा में अनुभव के लिए अंक और वर्गवार उत्तीर्ण अंकों की व्यवस्था अन्य विभागों में भी लागू की जाए।
मध्य प्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक (PMUMS) संगठन ने बिना किसी सरकारी मदद के दिवंगत शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के परिवारों को 4 करोड़ 33 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है। एक साल पहले शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक 15 परिवारों को 27.50 लाख रुपए की राहत मिली है। संगठन के 1.15 लाख पंजीकृत सदस्य मामूली राशि का योगदान करते हैं, जिससे प्रत्येक परिवार को 26 से 27 लाख रुपए तक का सहयोग मिलता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन संचालित होती है।
प्रदेश के लगभग 12 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए वर्ष 2019 से प्रस्तावित कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना में आपातकालीन चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि को लेकर उलझन बनी हुई है। मूल प्रस्ताव पांच लाख रुपये की प्रतिपूर्ति का था, लेकिन अधिकारियों के बीच डेढ़ से दो लाख रुपये की सीमा रखने पर मतभेद हैं, ताकि दुरुपयोग रोका जा सके। स्टेट हेल्थ एजेंसी ने ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें पेंशनर भी शामिल हैं। हालांकि, परिवार चिकित्सा प्रतिपूर्ति और पेंशनरों के परिवार की परिभाषा जैसे कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।