मध्यप्रदेश में लगभग 1.83 लाख संविदा, स्थाई और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करने के बावजूद समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से समान कार्य के लिए समान वेतन और चरणबद्ध नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग की है। नियमित कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि और पदोन्नति सहित कई लाभ मिलते हैं, जबकि संविदा कर्मचारियों का वेतन 8 हजार से 30 हजार रुपये तक सीमित है और उन्हें नौकरी की सुरक्षा भी नहीं मिलती। विशेषज्ञों ने संविदा नियुक्तियों के बढ़ते दायरे पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट नीति की आवश्यकता जताई है।