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ग्वालियर हाई कोर्ट का फैसला: सौतेले बेटे के कारोबार के लिए मां करा सकती है दुकान खाली

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सौतेला बेटा भी किराएदारी कानून के तहत बेटे की श्रेणी में आता है। यदि उसके कारोबार के लिए दुकान की वास्तविक जरूरत है, तो मां किराएदार से दुकान खाली करा सकती है। यह निर्णय 21 साल पुराने किराएदारी विवाद में आया, जिसमें जस्टिस आशीष श्रोती ने निचली अपीलीय अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली मंजिल की जगह को भूतल की दुकान का समान विकल्प नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘गोली मारो’ टिप्पणी मामले में अनुराग ठाकुर के खिलाफ एफआईआर पर पुनर्विचार याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने ‘गोली मारो’ टिप्पणी मामले में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने से संबंधित अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने माकपा नेता वृंदा करात द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी, जिसमें 29 अप्रैल के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी। पीठ ने कहा कि पहले दिए गए आदेश पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नहीं बनता और इसमें कोई त्रुटि नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व स्वीकृति के कानूनी पहलू पर निचली अदालतों से असहमति जताई थी, लेकिन अंततः एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर दिया क्योंकि संबंधित भाषणों से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।

सुप्रीम कोर्ट ने एससी आयोग के बकाया वेतन भुगतान आदेश देने के अधिकार को सीमित किया

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एससी आयोग) को कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान का आदेश देने का अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आयोग केवल जांच, सिफारिश और सलाह दे सकता है, जबकि बाध्यकारी आदेश जारी करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। कोर्ट ने यह भी बताया कि संविधान के अनुच्छेद 338, 338ए और 338बी के तहत गठित आयोगों की भूमिका सलाहकारी और सिफारिशी है, और उन्हें न्यायिक फैसले सुनाने या बाध्यकारी आदेश जारी करने का अधिकार नहीं दिया गया है।

साइबर धोखाधड़ी: 980 रुपये के विवाद पर 2.51 करोड़ रुपये का खाता फ्रीज नहीं कर सकते – हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी मामलों में बैंक खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विवादित राशि स्पष्ट होने पर पूरे खाते को फ्रीज करना उचित नहीं, बल्कि जांच एजेंसियां केवल संदिग्ध राशि पर डेबिट फ्रीज लगाएं। पूरे खाते को असाधारण परिस्थितियों में ही फ्रीज किया जा सकता है, जिसके लिए कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह फैसला भोपाल निवासी अर्चना शिवहरे की याचिका पर आया, जिनका 2.51 करोड़ रुपये का खाता मात्र 980 रुपये के संदिग्ध लेनदेन के कारण फ्रीज कर दिया गया था। कोर्ट ने शिकायत निवारण और खाता सक्रियण के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: स्कूलों द्वारा APAAR ID बनाना प्रतिबंधित, माता-पिता की सहमति अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें स्कूलों को माता-पिता की सहमति के बिना बच्चों की आईडी बनाने से प्रतिबंधित किया गया है। यह निर्णय भुवनेश्वर के माता-पिता द्वारा ओडिशा हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद आया, जिन्होंने सहमति पत्र में इंकार का विकल्प न होने पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है और माता-पिता को सहमति देने या न देने का अधिकार है। याचिका में यह भी मांग की गई कि आईडी न बनवाने वाले छात्रों को किसी भी शैक्षणिक सुविधा से वंचित न किया जाए।

फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वालों को कानूनी संरक्षण नहीं: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी से सरकारी नौकरी पाने वालों को कानून का संरक्षण नहीं मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी से प्राप्त नियुक्ति शुरू से ही अवैध मानी जाएगी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धोखाधड़ी हर कानूनी प्रक्रिया को खत्म कर देती है। तकनीकी आधार पर भी ऐसी कार्रवाई रद्द नहीं की जा सकती, और अदालत का उद्देश्य न्याय करना है, न कि गलत तरीके से लाभ लेने वालों को बचाना। यह फैसला फर्जी प्रमाण-पत्रों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।

इंदौर में कारोबारी से ठगे गए 1 करोड़ रुपए जिला कोर्ट के आदेश पर वापस मिले

इंदौर के एक बड़े कारोबारी से 10 करोड़ रुपए के लोन का झांसा देकर 1 करोड़ रुपए ठगे गए थे, जिसे अब जिला कोर्ट के आदेश पर पूरी तरह वापस कर दिया गया है। एक्सिस बैंक ने कोर्ट के निर्देश पर आरोपियों के फ्रीज किए गए खातों से राशि कारोबारी के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी रकम की वापसी साइबर ठगी के मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल है, जो समय पर शिकायत और खाते फ्रीज होने से संभव हुई।