भोपाल जिला अदालत में 46 जजों के पद खाली होने के कारण न्याय की गति धीमी पड़ गई है, जिससे लगभग 1.50 लाख मामले लंबित हैं। स्वीकृत 112 पदों में से केवल 66 जज ही कार्यरत हैं, जिसके चलते प्रत्येक अदालत पर 4 से 6 हजार मामलों का बोझ है। 20% से अधिक मामले 5 से 10 साल पुराने हैं। नए जजों के लिए पर्याप्त कोर्टरूम नहीं हैं; 10 कोर्टरूम को विधिक सेवा प्राधिकरण भवन में स्थानांतरित करना पड़ा है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पुरानी जेल की जमीन पर प्रस्तावित नई मल्टी-स्टोरी अदालत भवन परियोजना भी हाउसिंग बोर्ड के प्रस्ताव और जेल विभाग की कैदी शिफ्टिंग के कारण अटकी हुई है।
इंदौर में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन 9 अगस्त को बच्चों और बंदियों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी एवं सामाजिक मुद्दों पर मंथन हुआ। दो तकनीकी सत्रों में बाल हितैषी न्याय व्यवस्था, बच्चों के संरक्षण एवं पुनर्वास, तथा बंदियों व उनके परिवारों के पुनर्समावेशन और न्याय तक पहुंच पर चर्चा की गई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस विक्रम नाथ ने सत्रों की अध्यक्षता की। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि केवल कानून बनाने से न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि न्याय व्यवस्था और जनता के बीच दूरी कम होनी चाहिए।
पश्चिम बंगाल में मस्जिदों के लाउडस्पीकर को लेकर एक नया विवाद उत्पन्न हो गया है। आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि पुलिस बिना किसी लिखित आदेश के मस्जिद कमेटियों पर माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रही है। सिद्दीकी ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन होने पर मौजूदा कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, न कि मौखिक निर्देशों पर। उन्होंने इस मामले को लेकर अदालत जाने और पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को ईमेल भेजने की बात कही है।