जबलपुर हाईकोर्ट ने एक हत्या के मामले में करीब 17 साल तक आरोपी रहे मड़ियादो क्षेत्र के तीन भाइयों को बरी कर दिया है। अदालत ने जांच और अभियोजन पर सवाल उठाए। इस दौरान एक भाई की मौत हो गई, जबकि दो अन्य भाई दिल्ली में मजदूरी कर रहे हैं। परिवार ने लगभग दस साल जेल में बिताए और मुकदमे के कारण जमीन-जायदाद बेचनी पड़ी। परिवार को कानूनी राहत मिली है, लेकिन 17 वर्षों के नुकसान की भरपाई मुश्किल है।
इंदौर में 91 वर्षीय गीता चौहान को 19 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपने फ्लैट का कब्जा वापस मिल गया है। उनकी लकवाग्रस्त बेटे की देखभाल के लिए रखी गई केयरटेकर ज्योति पांजरे ने फर्जी विवाह प्रमाण-पत्र बनाकर फ्लैट पर अवैध कब्जा कर लिया था, जिसके बाद मां-बेटे को सालों तक किराए के मकान में भटकना पड़ा। वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 के तहत न्यायालय ने गीता चौहान के पक्ष में फैसला सुनाया। यह घटना मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की चिंताजनक स्थिति को उजागर करती है, जो लगातार तीसरे वर्ष देश में शीर्ष पर है।
जबलपुर हाई कोर्ट ने वरिष्ठ राजनेता मेनका गांधी और उनकी बहन अंबिका शुक्ला की भोपाल की पुश्तैनी 522 एकड़ जमीन से संबंधित कानूनी लड़ाई को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने उनकी रिट अपील निरस्त करते हुए वीएम सिंह के नाम विवादित संपत्ति के नामांतरण का रास्ता साफ कर दिया। यह विवाद वर्ष 1975 में शुरू हुआ था और इसमें 1993 की समझौता डिक्री तथा 2005 का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय शामिल है। हाई कोर्ट ने पारिवारिक समझौते की शर्तों को महत्वपूर्ण मानते हुए पांच दशक पुराने इस मामले पर विराम लगाया।