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भोपाल: ढाबा संचालक के घर पलंग के नीचे भूमिगत चैंबर से 55 लीटर अवैध शराब जब्त, तीन गिरफ्तार

भोपाल में जिला आबकारी टीम ने मंगलवार को एक कार्रवाई के दौरान ढाबा संचालक के घर से 55 लीटर अवैध शराब जब्त की। संचालक ने शराब को पलंग के नीचे बने भूमिगत चैंबर और फ्रिज में छिपा रखा था। टीम ने झगरिया खुर्द निवासी रानी बाई लौवंशी, सूर्या ढाबा संचालक नितेश त्यागी और बबलू डोंगरे सहित तीन आरोपियों पर आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण और परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा थी, जिसके तहत विभिन्न ढाबों और अन्य स्थानों पर दबिश दी गई।

भोपाल में एक लाख रिहायशी संपत्तियों पर सीलिंग का खतरा, नगर निगम का सर्वे शुरू

भोपाल नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शहर में लगभग 1 लाख रिहायशी संपत्तियों का सर्वे कर रहा है, जहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी किए जाएंगे और संपत्तियाँ सील हो सकती हैं। निगम को 15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट देनी है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मास्टर प्लान लागू न होने को इस स्थिति का कारण बताया है। व्यापारियों का कहना है कि इन व्यवसायों के बंद होने से 5 लाख से अधिक लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है, जबकि ये संस्थान करोड़ों का राजस्व भी दे रहे हैं।

भिंड में मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में 60 से अधिक वाहनों पर डेढ़ लाख का जुर्माना

भिंड शहर में सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनोज कुमार गोयल के नेतृत्व में एक विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दो घंटे के अभियान में 60 से अधिक वाहनों के चालान किए गए और लगभग डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। स्कूल बसों में पैनिक बटन बंद, स्पीड गवर्नर न होना और महिला अटेंडर की अनुपस्थिति जैसी कई सुरक्षा खामियां पाई गईं। चार पहिया और दोपहिया वाहनों के दस्तावेजों की भी जांच की गई। अभियान के दौरान एक दूल्हे की कार का भी चालान किया गया, जिसके दस्तावेज पूरे नहीं थे। अधिकारियों ने भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रखने की बात कही है।

देश में साइबर अपराध के मामलों में वृद्धि: चार साल में 50035 से 101928 हुए दर्ज केस

देश में साइबर अपराध के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जहाँ 2021 में 50035 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या 101928 तक पहुँच गई। ‘आईटी-बेईमानी-धोखा’ जैसी घटनाएँ प्रमुख हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) और ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) जैसी पहलें की हैं। ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (सीएफसीएफआरएमएस) के माध्यम से 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है।