मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सौतेला बेटा भी किराएदारी कानून के तहत बेटे की श्रेणी में आता है। यदि उसके कारोबार के लिए दुकान की वास्तविक जरूरत है, तो मां किराएदार से दुकान खाली करा सकती है। यह निर्णय 21 साल पुराने किराएदारी विवाद में आया, जिसमें जस्टिस आशीष श्रोती ने निचली अपीलीय अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली मंजिल की जगह को भूतल की दुकान का समान विकल्प नहीं माना जा सकता।