सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि हत्या के आरोपी नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है, क्योंकि किशोर न्याय कानून के तहत हत्या एक जघन्य अपराध है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एक नाबालिग की अपील खारिज करते हुए यह बात कही। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भादंसं की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा हत्या के लिए न्यूनतम सजा है, इसलिए यह जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। पीठ ने यह भी कहा कि प्रारंभिक मूल्यांकन के विरुद्ध अपील में हर मामले में मनोवैज्ञानिकों की सलाह अनिवार्य नहीं है।