ग्वालियर जिले में खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 17 अगस्त कर दी गई है ताकि अधिक किसान लाभ उठा सकें। अब तक 42,700 किसानों ने बीमा कराया है, जो पिछले वर्ष के समान है। हालांकि, अंचल में किसानों की अपेक्षित रुचि नहीं दिख रही है, खासकर अऋणी किसानों में, जिनमें से केवल 90 ने ही बीमा कराया है। बीमा न कराने के पीछे प्रशासनिक विसंगतियां, पटवारी हल्का इकाई प्रणाली, 72 घंटे की जटिल शर्त और फसल कटाई व क्लेम भुगतान में देरी जैसे कारण बताए गए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। राज्य में 30 जुलाई से खाद वितरण को सुगम और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए ‘हाइब्रिड मोड’ लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत विक्रेताओं को किसानों के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और खाद की मात्रा का विवरण रजिस्टर में दर्ज कर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। साथ ही, ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीद के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त और खरीद की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। विपणन वर्ष 2026-27 की नीति में संशोधन कर मूंग का अधिकतम 60% और उड़द का 25% तक ही उपार्जन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खंडवा में ‘बलराम कृषि महोत्सव’ के दौरान किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में 3,300 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। उन्होंने खंडवा में पुलिस बटालियन की स्थापना और मूंदी-खंडवा मार्ग के निर्माण की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है और प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है, जिससे निमाड़ क्षेत्र को लाभ मिला है।
जबलपुर की निरंतपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में 2015 में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 18 लाख रुपये के ऋण सात अपात्र लोगों को किसान बताकर बांटे गए। शिकायतें होने के बावजूद यह मामला करीब 11 साल तक दबा रहा। विधानसभा में पनागर विधायक सुशील तिवारी इंदू द्वारा मामला उठाए जाने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने पुनः जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। शुरुआती जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, और तत्कालीन प्रबंधक रमेश सोनी तथा अध्यक्ष प्रहलाद पटेल की भूमिका संदिग्ध है।