मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती विवाद का कारण बन गई है। सरकार कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण इसे हतोत्साहित कर रही है, जबकि किसान कम समय में अधिक लाभ के कारण इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। गोदामों में पिछले सालों की साढ़े तीन लाख टन से अधिक मूंग कमजोर गुणवत्ता के कारण पड़ी हुई है। किसान उपार्जन में प्रति हेक्टेयर निर्धारित डेढ़ क्विंटल की मात्रा से असंतुष्ट हैं, जबकि उनका दावा 14-16 क्विंटल का है। इस असंतुष्टि के कारण 3.47 लाख पंजीकृत किसानों में से केवल 82 हजार ने ही उपज बेची। किसान नेता राकेश टिकैत राजगढ़ आएंगे।
मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी के कोटा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने किसानों की बढ़ती संख्या और उत्पादन का हवाला देते हुए खरीदी कोटा 25% से बढ़ाकर 40% करने की मांग की है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए पहले स्वीकृत लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया है, क्योंकि मध्य प्रदेश को देश के कुल मूंग खरीदी कोटे का 87% हिस्सा पहले ही मिल चुका है। राज्य के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने 10 लाख टन मूंग आने का अनुमान लगाया है।