अखिल भारतीय किसान सभा ने किसान श्रमिकों की मांगों को लेकर 10 अगस्त को देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया है। मुरैना, कैलारस और सबलगढ़ में किसान गिरफ्तारी देंगे। यह आंदोलन अटल प्रोग्रेस वे के एलाइनमेंट में बदलाव, चंबल के बीहड़ों की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित करने और बंद पड़े शक्कर कारखाने को पूरी तरह से समाप्त करने के विरोध में किया जा रहा है। किसान नेता बादल सरोज आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। किसान इन मुद्दों पर अपनी मांगें उठा रहे हैं।
इंदौर शहर में रविवार रात से लगातार बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और मौसम में ठंडक बढ़ी है। इस वर्षा से निचले इलाकों में जलजमाव और स्कूलों में कम उपस्थिति देखी गई। कृषि विशेषज्ञों ने इसे धान और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए लाभकारी बताया है, जिन्हें पिछले 15 दिनों से बारिश की कमी का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, इंदौर को अभी भी औसत वार्षिक वर्षा कोटा पूरा करने के लिए लगभग 22 इंच बारिश की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश में भी अब तक औसतन 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है, और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश का अनुमान जताया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस मानसून में मध्य प्रदेश में औसत से 15 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। उन्होंने सोमवार को मंत्रालय में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर कम वर्षा से उत्पन्न स्थितियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को किसानों और नागरिकों को किसी भी परेशानी से बचाने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने रबी फसलों के लिए किसानों को प्रेरित करने, कम वर्षा में उगने वाली फसलों को प्राथमिकता देने, खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपदा प्रबंधन व राहत कार्यों के लिए सक्रिय रहने के निर्देश दिए।
धार जिले में 2,717 करोड़ रुपये की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से कार्य जारी है। यह परियोजना नर्मदा नदी के जल से जिले की चार तहसीलों के 247 गांवों की लगभग 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करेगी। नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा 14 जनवरी 2020 को स्वीकृत इस परियोजना में वर्ष 2022 में विस्तार किया गया था। वर्तमान में संपवेल और पंप हाउस का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके तहत 800 मीटर लंबी नहर का निर्माण भी शामिल है। परियोजना से क्षेत्र को सिंचाई, पेयजल और तालाबों में पानी भरने जैसे तीन प्रमुख लाभ मिलेंगे।
मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जहां 55 में से 48 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज हुई है। कई जिलों में वर्षा औसत से 46 फीसदी तक नीचे है, जिससे जलाशयों और खरीफ फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसतन 23 फीसदी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 16 फीसदी कम बारिश हुई है। धान, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलें प्रभावित हैं, खेतों में दरारें पड़ रही हैं और रोग बढ़ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों ने उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई है। किसानों ने सर्वे और तकनीकी सलाह की मांग की है।
पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने इंदौर में ‘क्यों रूठ जाती है प्रकृति’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अब पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया है। उन्होंने नदियों को पुनर्जीवित करने और वर्षा जल संचय की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. जोशी ने बताया कि जल संकट अब देशभर की समस्या है और भारत का ट्रॉपिकल देश होना एक लाभ है। उन्होंने मानवीय हस्तक्षेप के कारण बदलते मौसम, कृषि के नकारात्मक प्रभाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बजाय प्राकृतिक बुद्धिमत्ता पर काम करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पहाड़ों पर पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की भी बात कही।
मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बावजूद बारिश का वितरण असमान बना हुआ है, जिससे प्रदेश में अब तक 20 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। रविवार को दतिया, रीवा और सीधी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल, इंदौर सहित अधिकांश जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। राज्य में अब तक 17.2 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य 21.5 इंच से 4.3 इंच कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 23% और पश्चिमी हिस्से में 18% बारिश की कमी है, जो खेती के लिए चिंता का विषय है।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के आरएके कृषि महाविद्यालय सीहोर ने कृषि शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए परिसर में शहतूत के पौधे लगाए हैं। यह परिसर जल्द ही रेशम उत्पादन की लाइव लैब बनेगा, जहां छात्र रेशम कीट पालन, कोकून निर्माण और रेशम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। कीट विज्ञान विभाग के डॉ. नीलेश रायपुरिया के अनुसार, यह पहल आधुनिक सेरीकल्चर तकनीकों में दक्षता बढ़ाएगी, जिससे स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता के नए अवसर खुलेंगे। कुलगुरु डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला ने इसे प्रयोगात्मक और रोजगारोन्मुख कृषि शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
मध्य प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। 5 अगस्त तक राज्य में सामान्य से 19% कम बारिश दर्ज की गई है, जहां औसतन 16.27 इंच वर्षा हुई है। इस कमी से धान, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की गंभीर आशंका है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 22% और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 15% कम बारिश हुई है। खेतों में धान की क्यारियां सूखने लगी हैं, जिससे किसान ट्यूबवेल का सहारा ले रहे हैं। विशेषज्ञों ने ‘ड्राई स्पेल’ के कारण फसल उत्पादन में कमी की आशंका जताई है।
मध्य प्रदेश सरकार ने किसान आंदोलन के बाद ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन और स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथियां बढ़ा दी हैं। अब किसान 10 अगस्त तक मूंग उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे, जबकि मूंग और उड़द का उपार्जन 20 अगस्त तक चलेगा। कृषि विभाग द्वारा लागू की गई इस संशोधित व्यवस्था के तहत, किसानों को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर सहित अपना पूरा ब्योरा दर्ज करना होगा। मूंग का उपार्जन कृषकों के उत्पादन का 60 प्रतिशत तक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, समर्थन मूल्य पर उड़द बेचने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक मदद और उपार्जन में देरी से राहत मिलेगी।