ग्वालियर में बुधवार को बलराम जयंती महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल, शून्य प्रतिशत ब्याज योजना के सरलीकरण और कृषक कवच योजना का शुभारंभ होगा। इस प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर शामिल होंगे। 200 नवीन पंजीकृत प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाओं (पैक्स) के कार्यालयों का भी उद्घाटन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को सम्मानित करेंगे और विभिन्न पुरस्कार प्रदान करेंगे।
ग्वालियर में रविवार को हुई झमाझम वर्षा से शहर और गांवों में जलभराव की स्थिति बनी। पिछले तीन दिन की वर्षा से जिले की नदियां उफान पर हैं और पही, ककेटा तथा तिघरा बांध लबालब भर गए, जिससे शहर का जल संकट हल हो गया। प्रशासन ने नदियों के किनारे बसे गांवों को बांधों से पानी छोड़े जाने की संभावना पर अलर्ट किया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, निम्न दाब का क्षेत्र अब आगरा की ओर खिसक गया है, जिससे आगामी चार दिनों तक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। वर्षा से तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम हुआ है और खरीफ व रबी फसलों को लाभ मिला है।
इंदौर जिले में कम बारिश के कारण खेतों में जल संकट गहरा गया है। सितंबर माह समाप्त होने को है, लेकिन कई गांवों में तालाब और चेकडैम खाली हैं, और नलकूप भी साथ छोड़ रहे हैं। इससे लहसुन और आलू की बोवनी प्रभावित हो रही है, तथा अक्टूबर में गेहूं और चने की बोवनी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग कम पानी वाली फसलों के प्रचार-प्रसार के लिए गांवों का दौरा कर रहा है।
खरगोन जिले में मानसून के दौरान औसत से 10 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, फिर भी छोटे और बड़े जलाशयों में 87 प्रतिशत जलभराव है। देजला देवाड़ा, अपरवेदा और साटक बांध पिछले एक महीने से ओवरफ्लो हो रहे हैं, जिससे सिंचाई और पेयजल में राहत मिली है। भू-अभिलेख विभाग के अनुसार, इस सीजन में 759.46 मिमी बारिश हुई है। कृषि विभाग ने रबी सीजन के लिए 3.77 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा है, जिसमें गेहूं की बुवाई में कमी और चने के क्षेत्रफल में वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, गर्मी में पहाड़ी इलाकों में पेयजल संकट की आशंका है।
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में साइक्लोनिक सकुर्लेशन और ट्रफ के सक्रिय होने से आंधी-बारिश का दौर जारी है। बीते 24 घंटे में 10 से अधिक जिलों में वर्षा हुई है, जबकि गुरुवार को जबलपुर, रीवा-शहडोल संभाग के 12 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 9 अक्टूबर को भी पन्ना, सतना, रीवा सहित कई जिलों में बारिश होगी, जिसके बाद सिस्टम कमजोर होगा और मौसम साफ होने का अनुमान है। मानसून 3 अक्टूबर को लौट चुका है, लेकिन सिस्टम सक्रिय होने से यह बारिश हो रही है। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
अखिल भारतीय किसान सभा ने किसान श्रमिकों की मांगों को लेकर 10 अगस्त को देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया है। मुरैना, कैलारस और सबलगढ़ में किसान गिरफ्तारी देंगे। यह आंदोलन अटल प्रोग्रेस वे के एलाइनमेंट में बदलाव, चंबल के बीहड़ों की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित करने और बंद पड़े शक्कर कारखाने को पूरी तरह से समाप्त करने के विरोध में किया जा रहा है। किसान नेता बादल सरोज आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। किसान इन मुद्दों पर अपनी मांगें उठा रहे हैं।
इंदौर शहर में रविवार रात से लगातार बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और मौसम में ठंडक बढ़ी है। इस वर्षा से निचले इलाकों में जलजमाव और स्कूलों में कम उपस्थिति देखी गई। कृषि विशेषज्ञों ने इसे धान और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए लाभकारी बताया है, जिन्हें पिछले 15 दिनों से बारिश की कमी का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, इंदौर को अभी भी औसत वार्षिक वर्षा कोटा पूरा करने के लिए लगभग 22 इंच बारिश की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश में भी अब तक औसतन 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है, और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश का अनुमान जताया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस मानसून में मध्य प्रदेश में औसत से 15 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। उन्होंने सोमवार को मंत्रालय में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर कम वर्षा से उत्पन्न स्थितियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को किसानों और नागरिकों को किसी भी परेशानी से बचाने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने रबी फसलों के लिए किसानों को प्रेरित करने, कम वर्षा में उगने वाली फसलों को प्राथमिकता देने, खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपदा प्रबंधन व राहत कार्यों के लिए सक्रिय रहने के निर्देश दिए।
धार जिले में 2,717 करोड़ रुपये की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से कार्य जारी है। यह परियोजना नर्मदा नदी के जल से जिले की चार तहसीलों के 247 गांवों की लगभग 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करेगी। नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा 14 जनवरी 2020 को स्वीकृत इस परियोजना में वर्ष 2022 में विस्तार किया गया था। वर्तमान में संपवेल और पंप हाउस का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके तहत 800 मीटर लंबी नहर का निर्माण भी शामिल है। परियोजना से क्षेत्र को सिंचाई, पेयजल और तालाबों में पानी भरने जैसे तीन प्रमुख लाभ मिलेंगे।
मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जहां 55 में से 48 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज हुई है। कई जिलों में वर्षा औसत से 46 फीसदी तक नीचे है, जिससे जलाशयों और खरीफ फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसतन 23 फीसदी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 16 फीसदी कम बारिश हुई है। धान, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलें प्रभावित हैं, खेतों में दरारें पड़ रही हैं और रोग बढ़ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों ने उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई है। किसानों ने सर्वे और तकनीकी सलाह की मांग की है।