इंदौर में 91 वर्षीय गीता चौहान को 19 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपने फ्लैट का कब्जा वापस मिल गया है। उनकी लकवाग्रस्त बेटे की देखभाल के लिए रखी गई केयरटेकर ज्योति पांजरे ने फर्जी विवाह प्रमाण-पत्र बनाकर फ्लैट पर अवैध कब्जा कर लिया था, जिसके बाद मां-बेटे को सालों तक किराए के मकान में भटकना पड़ा। वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 के तहत न्यायालय ने गीता चौहान के पक्ष में फैसला सुनाया। यह घटना मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की चिंताजनक स्थिति को उजागर करती है, जो लगातार तीसरे वर्ष देश में शीर्ष पर है।