मंदसौर जिले में खरीफ सीजन 2025 के फसल बीमा मुआवजे को लेकर किसानों में गहरा असंतोष है। अविवृष्टि और बीमारी से फसलों को नुकसान होने के बावजूद किसानों को उचित बीमा राशि नहीं मिली है, जिससे मल्हारगढ़ और भानपुरा सहित कई क्षेत्रों में प्रदर्शन हुए। किसानों ने मुआवजे में विसंगति का आरोप लगाया, जहां कुछ को हजारों रुपए मिले तो कुछ को नाममात्र की राशि। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1.38 लाख से अधिक किसानों को 22.66 करोड़ रुपये का क्लेम मिला, लेकिन किसानों का दावा है कि सोयाबीन में शत-प्रतिशत नुकसान हुआ था।
मध्य प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। 5 अगस्त तक राज्य में सामान्य से 19% कम बारिश दर्ज की गई है, जहां औसतन 16.27 इंच वर्षा हुई है। इस कमी से धान, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की गंभीर आशंका है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 22% और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 15% कम बारिश हुई है। खेतों में धान की क्यारियां सूखने लगी हैं, जिससे किसान ट्यूबवेल का सहारा ले रहे हैं। विशेषज्ञों ने ‘ड्राई स्पेल’ के कारण फसल उत्पादन में कमी की आशंका जताई है।
मध्य प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय हो गया है, पिछले 36 घंटों से 35 से अधिक जिलों में लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक वर्षा जारी रहने का अनुमान लगाया है। बुधवार को शिवपुरी, गुना, सागर और डिंडौरी समेत 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में भी अच्छी बारिश की संभावना है। राज्य में वर्षा का अंतर घटकर 14 प्रतिशत रह गया है, हालांकि 41 जिलों में अभी भी सामान्य से कम बारिश है। देवास में सर्वाधिक और आलीराजपुर में सबसे कम वर्षा दर्ज हुई है।