जबलपुर में एथनाॅल उत्पादन के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा आवंटित चावल की आपूर्ति में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। शहपुरा के वेयरहाउस से उठवाया गया हजारों मीट्रिक टन चावल निर्धारित एथनाॅल प्लांट तक नहीं पहुंचा, बल्कि रास्ते में ही अन्य स्थानों पर खपा दिया गया। इस फर्जीवाड़े में शहर के राइस मिलर, ट्रांसपोर्टर और एफसीआई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। परिवहन दस्तावेजों में हेरफेर और जीपीएस सिस्टम की कमी जैसे अनियमितताएं भी उजागर हुई हैं। एफसीआई अधिकारियों का कहना है कि गेट से बाहर जाने के बाद चावल पर उनका अधिकार नहीं रहता है।
मध्य प्रदेश में इथेनॉल उत्पादन के नाम पर हुए चावल घोटाले की जांच में एसआईटी ने तीन राज्यों के 14 राइस मिल संचालकों को संलिप्त पाया है। इनमें मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे के बड़े भाई कुमार कावरे की हर्ष राइस मिल भी शामिल है, जिसके बिजनेस पार्टनर और परिवार के सदस्यों से पूछताछ हुई है। कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देश पर एफसीआई और नागरिक आपूर्ति निगम ने इन मिलरों को धान वितरण रोकने को कहा है। यह मामला 3 जून को 242 क्विंटल सरकारी चावल से भरे ट्रक के पकड़े जाने से सामने आया था, जिसमें अब तक 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।