इंदौर नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने पर प्रतिदिन लगभग 14 लाख रुपये और सालाना 50 करोड़ रुपये खर्च करता है। इतनी भारी राशि खर्च होने के बावजूद शहर की सड़कें बदहाल हैं और गड्ढे कम नहीं हो रहे हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी 50 करोड़ के वार्षिक बजट को स्वीकार किया है। लगभग 70 प्रतिशत सीमेंटेड सड़कों पर डामर के पैचवर्क की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बारिश में डामर हट जाता है। जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि वर्षा के कारण काम रुका है और ठेकेदार बारिश थमने पर बिना अतिरिक्त शुल्क के दोबारा पैचवर्क करेंगे।
ग्वालियर में दो-तीन दिनों की वर्षा से शहर की सड़कें बदहाल हो गई हैं, जिससे नगर निगम के समय पर निर्माण और पैच रिपेयरिंग में लापरवाही उजागर हुई है। करोड़ों की लागत से बनी ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कों में भी जलभराव और बड़े गड्ढे हैं, जिससे व्यापारी और ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। कारोबारियों ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, जबकि ठेकेदार राबिन सक्सेना ने 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया है और गिट्टी निकलने की बात से इनकार किया है। झांसी रोड के धंसने के बावजूद अधिकारियों ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। शिंदे की छावनी और सिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में भी सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।
इंदौर-देवास बायपास पर अर्जुन बड़ौद फ्लाईओवर की सर्विस रोड चार माह पहले निर्माण पूरा होने के बावजूद गड्ढों से भरी है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। एनएचएआई ने मई में मरम्मत के निर्देश दिए थे, लेकिन कार्य नहीं हुआ। वहीं, मांगलिया में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण से स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का पैदल आवागमन बाधित है, मार्ग पर कीचड़ और फिसलन से लोग गिर रहे हैं। अवैध टैंकर पार्किंग से समस्या और बढ़ी है। ग्रामीणों ने वैकल्पिक मार्ग और अवैध पार्किंग पर रोक की मांग की है।