इंदौर उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता से मुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था 24 सप्ताह या उससे कम है, तो एमटीपी एक्ट की निर्धारित शर्तों के तहत डॉक्टर और अस्पताल कार्रवाई कर सकते हैं। यह आदेश एक नाबालिग पीड़िता की याचिका पर दिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य कमिश्नर को राज्य के सभी अस्पतालों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने जबलपुर उच्च न्यायालय के 2025 के एक पूर्व फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 24 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए चिकित्सकों की राय पर्याप्त मानी गई थी।