जबलपुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित गुप्ता ने नईदुनिया विमर्श कार्यक्रम में ‘नकली’ खाद्य पदार्थ की सही परिभाषा समझाई। उन्होंने बताया कि हर खराब उत्पाद नकली नहीं होता, बल्कि वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों से बाहर होता है। ऐसे उत्पादों को सब-स्टैंडर्ड, मिसब्रांडेड और अनसेफ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। गुप्ता ने दूध उत्पादों, विशेषकर पनीर और खोवा में मिलावट की संभावनाओं, विभिन्न प्रकार की वसा के उपयोग और उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक सावधानियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उपभोक्ताओं को लेबल जांचने और शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया।
जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों के बाद केंद्र सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है। दिसंबर 2022 से अब तक 1,040 से अधिक दवा निर्माण इकाइयों की जोखिम-आधारित जांच की गई, जिसमें 950 से अधिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इन कार्रवाइयों में उत्पादन बंद कराना, लाइसेंस निलंबित करना और कारण बताओ नोटिस जारी करना शामिल है। जांचे गए नमूनों में 14,702 दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जबकि 1,613 नमूने नकली या मिलावटी पाए गए, जिसके बाद संबंधित कंपनियों पर नियमानुसार कार्रवाई हुई।