मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण बिजली संकट गहरा गया है। पर्याप्त बारिश न होने से बांधों में जलस्तर कम हो गया है, जिससे जलविद्युत उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में प्रतिदिन 13 से 14 हजार मेगावाट तक पहुंच रही बिजली की मांग को पूरा करने में कंपनियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सामान्य स्थिति की तुलना में 2400 से 2500 मेगावाट बिजली का उत्पादन कम हो गया है। इस कमी की भरपाई के लिए ताप विद्युत संयंत्रों और बाहर से बिजली खरीदने पर निर्भरता बढ़ गई है, जिसके लिए मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी करीब दस रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली क्रय कर रही है।