मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 4,573 स्वीकृत पदों में से 2,581 पद (56.44%) खाली हैं। वहीं, 24 विशेषज्ञ डॉक्टर स्वास्थ्य संचालनालय में प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं, जिनमें तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ 25 वर्षों से पदस्थ हैं। इस कमी के कारण जिला अस्पतालों में इलाज और ऑपरेशन जैसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, और मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करना पड़ रहा है। सरकार भर्ती प्रक्रिया चला रही है, लेकिन रिक्त पदों की तुलना में रफ्तार धीमी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या और गंभीर है।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के अनुसार, प्रदेश में जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराने वाली माताओं का प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाने वाली माताओं की संख्या 74% से घटकर 56.4% हो गई है। इसी दौरान पांच साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया 6.4% से बढ़कर 10.5% हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मां का दूध बच्चों को डायरिया और अन्य संक्रमणों से बचाता है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी छह माह तक केवल स्तनपान का प्रतिशत कम है, जिससे बच्चों में कुपोषण की गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं।
भोपाल के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के दंत रोग विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मुख कैंसर स्क्रीनिंग डिवाइस और मोबाइल ऐप विकसित किया है। भारत सरकार ने इस तकनीक को पेटेंट दिया है, जो मध्य प्रदेश में अपनी तरह की पहली है। इसका उद्देश्य मुख कैंसर की शुरुआती पहचान करना है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, जहां आशा कार्यकर्ता जैसे स्वास्थ्यकर्मी इस तकनीक का उपयोग कर सकेंगे। यह भारत में प्रतिवर्ष सामने आने वाले लगभग 1.5 लाख नए मुख कैंसर मरीजों की समस्या का समाधान करने में सहायक होगी, क्योंकि अधिकतर मरीज बीमारी बढ़ने के बाद ही अस्पताल पहुँचते हैं।