उज्जैन के चार मॉडल पूरे मध्य प्रदेश की पंचायतों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। नरवर ग्राम पंचायत ने एक वर्ष में एक करोड़ रुपये से अधिक का कर संग्रह कर स्व-राजस्व का नया मानक स्थापित किया है। जिले की सभी ग्राम पंचायतों में सौर ऊर्जा व्यवस्था स्थापित की गई है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित कायथा टोल प्लाजा ने तीन वर्षों में 1.80 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। ‘प्रोजेक्ट स्वाध्याय’ के तहत नौ हजार विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण दिया गया है।
कटनी जिले की छपरा ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं और आर्थिक गड़बड़ियों के मामले में जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर ने 13,96,522 रुपये की वसूली का आदेश दिया है। यह कार्रवाई पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत की गई। सरपंच सुषमा गुप्ता, उनके पति नीरज कुमार गुप्ता, तत्कालीन सचिव गंगाराम हल्दकार और उपयंत्री सीबी चौबे पर अवैध वसूली और निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप हैं। सभी संबंधितों को 15 दिन के भीतर राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उज्जैन के महिदपुर तहसील के ग्राम खुरचेनिया प्रताप में श्रावण माह के दौरान नेंग मांगने को लेकर दो किन्नर गुटों के बीच हिंसक विवाद हो गया। एक गुट ने दूसरे पर फर्जी किन्नर होने का आरोप लगाया, जिसके बाद लाठी-डंडों से मारपीट हुई और तीन लोग घायल हो गए। इस घटना का वीडियो वायरल होने पर ग्रामीणों ने पंचायत बुलाई। पंचायत ने गांव में किसी भी किन्नर गुट के प्रवेश पर रोक लगाने और मांगलिक अवसरों पर नेंग के लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भोपाल के नांदनी गांव में विकास के दावों की पोल खुल गई, जहां एक महिला के शव की अंतिम यात्रा घुटनों तक कीचड़ भरे रास्ते से निकालनी पड़ी। मुक्तिधाम तक सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को कंधों पर शव ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से शिकायतें करने के बावजूद पंचायत और जनप्रतिनिधियों ने समस्या का समाधान नहीं किया। सरपंच को मौके पर बुलाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। मुक्तिधाम के वैकल्पिक रास्ते पर भी अतिक्रमण है, जिसके कारण ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते का उपयोग करना पड़ा।
जबलपुर विकासखंड की रीमा ग्राम पंचायत में सड़क न होने के कारण 11 वर्षीय माया मरावी के शव को हाथ ठेले पर ले जाना पड़ा। बच्ची का निधन मेडिकल कॉलेज जबलपुर में हुआ था। परिजन शव को निजी वाहन से गांव ला रहे थे, लेकिन कच्चा रास्ता कीचड़ में बदल जाने से वाहन फंस गया। ग्रामीणों ने बरगी नगर से हाथ ठेला मंगाकर शव को गांव तक पहुंचाया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पक्की सड़क नहीं है और हर बारिश में रास्ता दलदल बन जाता है, जिससे एम्बुलेंस भी नहीं आती। आक्रोशित ग्रामीणों ने तत्काल सर्व-मौसमी पक्की सड़क बनाने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।