इंदौर में अधिकारियों की आईडी का दुरुपयोग कर संपत्ति कर खातों में फर्जी तरीके से नाम बदलने का बड़ा घोटाला सामने आया है। एक वर्ष के भीतर 450 से अधिक खातों में यह बदलाव किया गया। इस खुलासे के बाद इंदौर नगर निगम ने नामांतरण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब नाम बदलने के लिए ‘चेन ऑफ डॉक्यूमेंट’ अनिवार्य होगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल की जाएगी, जिसमें वकील की उपस्थिति और बिल कलेक्टर द्वारा मौके पर सत्यापन शामिल है। नगर निगम फर्जी रजिस्ट्रियों को रद्द कराने के लिए भोपाल कार्यालय को पत्र भेजेगा।
बालाघाट में डबल मनी घोटाला मामले में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के निवेशकों को उनके पैसे वापस दिलाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने सोमेंद्र कंकरायने और उनके एजेंटों के माध्यम से निवेश करने वाले 113 लोगों की पहली सूची जारी की है। इन निवेशकों को 28 और 29 जुलाई को बालाघाट स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करना होगा। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि दूसरी सूची भी जल्द जारी की जाएगी। यह फर्जीवाड़ा 500-600 करोड़ रुपये का अनुमानित है, जिसमें मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने सहित 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम के दो साल पुराने फर्जी बिल घोटाले में 20,000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश की है। इसमें कुल 32 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिनमें निगम इंजीनियर अभय राठौर, ड्रेनेज कर्मचारी, ठेकेदार फर्मों के संचालक और स्थानीय निधि लेखा परीक्षा कार्यालय के अधिकारी शामिल हैं। आरोपितों पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं। जांच में पता चला कि 103.42 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक धनराशि फर्जी बिलों के माध्यम से गबन की गई। ईडी ने 59.18 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, जब्त या फ्रीज की हैं और तीन मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।
मध्यप्रदेश सहकारिता विभाग की विभागीय पदोन्नति परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। कर्मचारी संघर्ष मोर्चा ने प्रमुख सचिव को शिकायत करते हुए प्रश्नपत्र लीक होने, गोपनीय प्रक्रिया में गड़बड़ी और नियम विरुद्ध पदोन्नति दिलाने का आरोप लगाया है। मोर्चा ने स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। आरोपों के अनुसार, 100 से अधिक बाबुओं को सहकारिता निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया, जिसका प्रश्नपत्र आठवीं से दसवीं कक्षा के स्तर का था और परीक्षा से पहले ही परीक्षार्थियों तक पहुँच गया था, जिससे अधिकांश ने 99 अंक प्राप्त किए।