एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसकी 10 माह की बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महिला को अगली सुनवाई तक प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति दी। यह मुलाकात सागर महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक की मौजूदगी में होगी। याचिकाकर्ता दमोह की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता थी जिसने बच्ची को जन्म दिया था। बाल कल्याण समिति ने मां होने पर संदेह व्यक्त किया था, हालांकि महिला ने जन्म प्रमाण-पत्र व डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत किए थे।