नेशनल एजुकेशन यूथ यूनियन (नेयू) के पदाधिकारियों ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने वर्ष 2019 से भर्ती परीक्षाओं के परिणामों में 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले को समाप्त करने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। नेयू ने 13 प्रतिशत होल्ड सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने, साक्षात्कार के अंक अधिकतम 100 निर्धारित करने और प्रारंभिक परीक्षा शुल्क समाप्त करने की भी मांग की। संगठन ने पुलिस पर उनके परिवार के सदस्यों को परेशान करने का आरोप भी लगाया।
उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के विश्वविद्यालयों और शासकीय-अशासकीय महाविद्यालयों के लिए नया शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया है, जिसमें परीक्षा पूर्व तैयारी अवकाश (प्रिपरेटरी लीव) को अनिवार्य किया गया है। इस निर्णय से विद्यार्थियों को वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाओं से पहले अपनी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे वे बिना नियमित कक्षाओं के दबाव के बेहतर अध्ययन कर सकेंगे। विभाग के अनुसार, इसका उद्देश्य पाठ्यक्रम का पुनरावलोकन, कमजोर विषयों पर ध्यान केंद्रित करना और परीक्षा तनाव को कम करना है। प्रायोगिक परीक्षाएं 5 से 20 मार्च 2027 के बीच होंगी।
मध्यप्रदेश विधानसभा में पेश निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार उच्च शिक्षा का निजीकरण कर उसे उद्योग में बदलना चाहती है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने ₹5 करोड़ सुरक्षा राशि और 2500 वर्गमीटर भूमि की अनिवार्यता खत्म करने पर सवाल उठाए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा है कि यह उच्च शिक्षा के व्यापारीकरण को बढ़ावा देगा और गुणवत्ता को प्रभावित करेगा।