पद्म विभूषण तीजनबाई की अद्वितीय कलात्मक विरासत को अब मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय में स्थायी रूप से संरक्षित किया जाएगा। संस्कृति विभाग ने उनके जीवन, कला और उपलब्धियों से जुड़ी दुर्लभ स्मृतियों को सहेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मध्य प्रदेश जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी उनके देश-विदेश में हुए प्रदर्शनों के आडियो-वीडियो, दुर्लभ तस्वीरें और निजी वस्तुओं का विशेष संग्रह तैयार कर रही है। पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली तीजनबाई ने पारंपरिक शैली को नया आयाम दिया था। भोपाल से उनका गहरा रिश्ता रहा, जहां उन्होंने 1983 में पहली और 2023 में अंतिम प्रस्तुति दी थी।