सीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपना 25वें दिन का अनशन समाप्त करने की अपील की है, उनके स्वास्थ्य को देखते हुए। दीपके ने स्पष्ट किया कि अनशन खत्म होने के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटा जाएगा। उन्होंने आंदोलन के शांतिपूर्ण रहने का भरोसा दिया। इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सुनवाई का अवसर दिए बिना मुरार तहसीलदार द्वारा पारित एक रिव्यू आदेश रद्द किया, इसे प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन बताया। एक अन्य मामले में, बीहड़ चरनोई भूमि पर फलदार पौधे लगाने की अनुमति वाली याचिका खारिज कर दी गई, क्योंकि भूमि वैधानिक श्रेणियों में नहीं आती थी। हाईकोर्ट ने अशोकनगर में मिड-डे मील समूह को हटाने का जनपद पंचायत सीईओ का आदेश भी निरस्त किया, क्योंकि उन्हें यह अधिकार नहीं था और सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर में जीएसटी ट्रिब्यूनल न होने पर केंद्र और राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा है। यह नोटिस मप्र टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि 2019 में जीएसटी काउंसिल की बैठक में इंदौर में राज्यपीठ स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। याचिका में इंदौर में ट्रिब्यूनल न स्थापित करने को मनमाना निर्णय और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
उज्जैन में महाकाल मंदिर पार्किंग के लिए उपयोग की जा रही 40 हजार वर्गफीट शासकीय भूमि की रजिस्ट्री को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि शासकीय जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई। एडवोकेट जयेश गुरनानी ने बताया कि यह जमीन 1950 में शासकीय कारखाने के नाम दर्ज थी, पर बाद में निजी नाम दर्ज हो गए। तहसीलदार की अनुशंसा के बावजूद यह जमीन एक कंपनी को पंजीकृत कर दी गई थी। न्यायालय ने सिंहस्थ 2028 का भी उल्लेख किया।