मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को चुनौती देने वाली एक याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास, प्रमुख सचिव वित्त और मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता को योजना के सभी हितग्राहियों का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उन्हें प्रकरण में पक्षकार बनाया जा सके। याचिका में योजना की वर्तमान व्यवस्था, भुगतान और वित्तीय दायित्व को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हितग्राहियों को नोटिस तामील कराने का पूरा भार याचिकाकर्ता पर नहीं होगा।
हाई कोर्ट ने बुरहानपुर की भाजपा विधायक अर्चना चिटनिस और प्रदेश के गृह सचिव समेत अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस शक्कर मिल के नाम पर करोड़ों रुपये की बैलेंस शीट तैयार करने और उसके आडिट कराने के आरोपों से संबंधित याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता धर्मेंद्र शुक्ला ने आरोप लगाया है कि मिल का उद्घाटन हुआ और सरकारी राशि भी मिली, लेकिन मौके पर कोई प्लांट नहीं मिला। इस मामले में जमीन खरीद, प्लांट स्थापना और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता से जुड़ी जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम से पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट ने सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार के गुमराह करने के प्रयास पर टिप्पणी की। न्यायालय ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए एक अधिवक्ता की अध्यक्षता में तकनीकी टीम सहित कमीशन गठित करने का भी संकेत दिया।
जबलपुर हाई कोर्ट ने दमोह नगर पालिका द्वारा शहरी क्षेत्र में स्लाटर हाउस पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने वाली जनहित याचिका निरस्त कर दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने बताया कि इसी विषय से संबंधित याचिका पहले से हाई कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नई याचिका दाखिल करने के बजाय लंबित प्रकरण में हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी। यह याचिका दमोह के कसाई मंडी क्षेत्र के निवासियों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें नगर पालिका के 29 अप्रैल 2026 के प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी।
मध्य प्रदेश में चार अगस्त से चल रही पटवारियों की हड़ताल के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर इस याचिका में हड़ताल से आम नागरिकों को हो रही परेशानी और राजस्व कार्यों के प्रभावित होने का हवाला दिया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि शासकीय कर्मचारियों को जनसेवा से जुड़े दायित्वों के कारण हड़ताल का अधिकार नहीं है। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे हैं और इस पर जल्द सुनवाई की संभावना है।
इंदौर के सुमन नगर में गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट ने नगर निगम और शासन को घायलों के उपचार के खर्च के लिए समान रूप से जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष बराबरी से खर्च वहन करेंगे। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एसडीएम जगदीश धनगर ने झूठे शपथ पत्र के लिए माफी मांगी। उन्होंने बताया कि टाइपिंग की गलती से अहमदाबाद अस्पताल के भुगतान की गलत जानकारी दी गई थी। धनगर ने सात दिन में भुगतान और एक सप्ताह में घायलों को जमा राशि वापस दिलवाने का आश्वासन दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बिलौआ अवैध खनन मामले में सुनवाई करते हुए माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने प्रभारी माइनिंग अधिकारी घनश्याम यादव को अशोक सिंह यादव की तीनों खदानों का पिछले दो माह का उत्पादन रिकॉर्ड शपथ-पत्र सहित पेश करने का निर्देश दिया। चेतावनी दी गई कि जानकारी छिपाने या गलत तथ्य प्रस्तुत करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना, भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर को भी अवैध मार्गों से खनिज परिवहन पर निगरानी की पूरी जिम्मेदारी दी है।
हाईकोर्ट में उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों को बिना योजना के शुरू करने पर शासन जवाब नहीं दे सका। जनहित याचिका में बांड जारी करने की योजना को चुनौती दी गई थी, जिसके लिए आवश्यक अनुमतियां नहीं ली गई हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने तीन प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार व नवनिर्माण के लिए टेंडर जारी किए हैं, जिनकी अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये है। परियोजना के लिए न तो प्रशासनिक-वित्तीय स्वीकृतियां हैं और न ही जमीन का अधिग्रहण हुआ है। सरकार ने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर की खराब यातायात व्यवस्था पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी जबलपुर नगर निगम को सौंपी है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी निगम को प्रत्येक सिग्नल हेतु सालाना 1.50 लाख रुपए प्रदान करेंगे। कोर्ट ने यातायात में बाधा बनने वाले अतिक्रमण और अन्य अवरोधों को हटाने के भी निर्देश दिए। अगली सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में होगी। यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ.
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी संजीव कुमार मेहरा द्वारा सरकारी कार्यालयों में महिला सुरक्षा और यौन उत्पीड़न निवारण समितियों के गठन की मांग वाली जनहित याचिका जबलपुर हाईकोर्ट से वापस ले ली गई है। सुनवाई के दौरान, बोर्ड ने याचिकाकर्ता के खिलाफ एक महिला कर्मचारी द्वारा की गई पुरानी यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायत का उल्लेख किया, जिसके बाद विभागीय जांच की सिफारिश की गई थी। युगलपीठ के रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और याचिका को निरस्त कर दिया।