सीहोर जिले में रविवार सुबह से सोमवार रात तक हुई मूसलाधार बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए, 24 घंटे में 3.96 इंच बारिश दर्ज की गई। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया और घरों-दुकानों में पानी घुसने से नुकसान हुआ। श्यामपुर क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बने, जहां कुलांसी नदी उफान पर आने से एक दर्जन गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ। चरनाल गांव में बड़े नुकसान की आशंका है, जबकि सीहोर शहर में रिटर्निंग वाल ने बड़े जलभराव को रोका। प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टी की घोषणा की है और लोगों से उफनती नदियों को पार न करने की अपील की है।
जबलपुर और संभाग के जिलों में मानसून फिर सक्रिय हो गया है, शनिवार रात से शुरू हुई बारिश रविवार को भी जारी रही। मौसम विभाग ने 20 अगस्त तक हल्की से भारी बारिश का अनुमान जताया है। उत्तर ओडिशा पर बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसून ट्रफ के सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। रविवार को 7 मिमी बारिश के साथ कुल मानसून वर्षा 346 मिमी दर्ज हुई, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है। शहर के कई इलाकों में जलभराव और कीचड़ से आवागमन प्रभावित हुआ। पिछले दो दिनों में अधिकतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है।
सीहोर जिले के जामनी गांव में भारी बारिश के कारण उफनते नाले ने एंबुलेंस का रास्ता रोक दिया। ऐसे में एसडीआरएफ टीम ने नाव की मदद से एक प्रसूता को सुरक्षित बाहर निकालकर एंबुलेंस तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे जिला चिकित्सालय सीहोर में भर्ती कराया गया। यह घटना जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच हुई, जहाँ पिछले 24 घंटों में औसतन 3.96 इंच वर्षा दर्ज की गई। श्यामपुर तहसील में सर्वाधिक 8.27 इंच बारिश हुई। कई नदी-नाले उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव से लोग परेशान हैं, जिस पर प्रशासन नजर रख रहा है।
भोपाल में देर रात से जारी तेज बारिश के कारण शिवनगर कॉलोनी सहित कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया, जिससे सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों में पानी घुस गया। भोपाल-बैरसिया मार्ग समेत कई प्रमुख रास्ते बंद कर दिए गए। कलेक्टर के निर्देश पर नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है, हालांकि शिक्षकों को स्कूल पहुंचना होगा। मंत्री विश्वास सारंग ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत सामग्री पहुंचाने और नाले-नालियों की सफाई के निर्देश दिए। जलभराव ने शहर की निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
राजधानी भोपाल में सोमवार को भारी बारिश के कारण स्कूलों में जलभराव हुआ। भोपाल कलेक्टर के निर्देश पर नर्सरी से 12वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया, लेकिन आदेश में देरी से कई विद्यार्थी स्कूल पहुंच गए। ईंटखेड़ी और बैरसिया जैसे निचले इलाकों के स्कूलों में घुटनों तक पानी भर गया। ई-अटेंडेंस के कारण शिक्षकों को जलभराव के बीच भी स्कूल जाना पड़ा, हालांकि बाद में जलभराव वाले स्कूलों को ई-अटेंडेंस से छूट दी गई।
दैनिक भास्कर ऐप का ‘भास्कर समाधान’ खंड भोपाल में जनसमस्याओं के निवारण में प्रभावी साबित हो रहा है। इस मंच के माध्यम से नागरिक सीधे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक अपनी शिकायतें पहुंचाते हैं। वार्ड 47 के पंचशील नगर में गटर के पानी की समस्या का समाधान होने पर पार्षद गिरजा राजेश खटीक को ‘पब्लिक स्टार’ नामित किया गया। वार्ड 75 के कृषक नगर में भी गंदगी और पीने के पानी की समस्या दूर हुई। हालांकि, गांधी नगर, त्रिलंगा, शिरडीपुरम और बागमुगलिया जैसे अन्य वार्डों में कचरा, खुली नालियों, बंद स्ट्रीट लाइट और चोक चैंबर जैसी कई शिकायतें अभी भी लंबित हैं।
मध्य प्रदेश में पिछले दो दिनों से सक्रिय मानसून के कारण भारी बारिश हुई है, जिससे राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में जलभराव और आवागमन प्रभावित हुआ है। भोपाल और आगर-मालवा में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने नीमच सहित दस जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ा है, जिससे कई डैम के गेट खोलने पड़े हैं। हालांकि, प्रदेश में अब तक सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
भोपाल में देर रात से हो रही लगातार तेज बारिश के चलते जिला प्रशासन ने नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह निर्णय विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किया गया है। आदेश सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर लागू होगा। शहर में कई जगह जलभराव और यातायात प्रभावित होने के कारण यह फैसला लिया गया है। शिक्षकों और कर्मचारियों को हालांकि स्कूल पहुंचना होगा। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
ग्वालियर में दो-तीन दिनों की वर्षा से शहर की सड़कें बदहाल हो गई हैं, जिससे नगर निगम के समय पर निर्माण और पैच रिपेयरिंग में लापरवाही उजागर हुई है। करोड़ों की लागत से बनी ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कों में भी जलभराव और बड़े गड्ढे हैं, जिससे व्यापारी और ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। कारोबारियों ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, जबकि ठेकेदार राबिन सक्सेना ने 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया है और गिट्टी निकलने की बात से इनकार किया है। झांसी रोड के धंसने के बावजूद अधिकारियों ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। शिंदे की छावनी और सिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में भी सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।
शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश से महुअर नदी उफान पर आ गई है। गुरुकुदवाया, सजोर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गुरुकुदवाया पंचायत के कई घरों में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया, जिससे घरेलू सामान खराब हो गया और शासकीय स्कूल भी जलमग्न हो गए। बारिश से सड़कें, गलियां और खेत तालाब में तब्दील हो गए, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ और खड़ी फसलें डूब गईं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द सर्वे और राहत कार्य की मांग की है। क्षेत्र में बारिश जारी है और नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।