राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उज्जैन के पवित्र सप्तसागरों में सीवेज प्रदूषण पर सख्ती दिखाई है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच एनजीटी ने पाया कि सात में से छह प्रमुख कुंडों का पानी स्नान योग्य नहीं बचा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इन जलाशयों में फीकल कोलीफार्म और टोटल कोलीफार्म की मात्रा केंद्रीय मानकों से अधिक है, जो सीवेज की मौजूदगी का संकेत देती है। एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उज्जैन नगर निगम आयुक्त को 30 दिनों के भीतर जल गुणवत्ता सुधारने तथा प्रदूषण फैलाने वालों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए हैं।