मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में निचली अदालत के उम्रकैद के फैसले को पलटते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। जस्टिस वी.के. अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की बेंच ने रेडियोलॉजिस्ट की मेडिकल रिपोर्ट पर भरोसा जताया, जिसके अनुसार पीड़िता घटना के समय 18 वर्ष से अधिक की थी। हाईकोर्ट ने स्कूल रिकॉर्ड की तुलना में रेडियोलॉजिस्ट की राय को अधिक विश्वसनीय माना। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि पीड़िता नाबालिग थी या उसे जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया था। यह मामला बालाघाट जिले की वारासिवनी कोर्ट से संबंधित था।