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1962 भारत-चीन युद्ध: चीनी सैनिक के वंशजों को जाति प्रमाण पत्र नहीं

बालाघाट में एक परिवार का दावा है कि 1962 भारत-चीन युद्ध के दौरान बंदी बनाए गए एक चीनी सैनिक ने भारत में निवास कर एक भारतीय महिला से विवाह किया था। अब उनकी तीसरी पीढ़ी को पिता की नागरिकता और जाति संबंधी नियमों के कारण जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। तिरोड़ी गांव के विष्णु वांग के अनुसार, उनके पिता चीनी सेना के सैनिक थे जिन्हें युद्धबंदी बनाया गया और लगभग सात साल तक विभिन्न भारतीय जेलों में रखा गया था। सजा पूरी होने के बाद उन्हें भारत में रहने की अनुमति मिली, जहाँ उन्होंने परिवार बसाया।

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी के जाति प्रमाण-पत्र जांच का 21 साल पुराना आदेश किया निरस्त

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी महेंद्र सिंह ठाकुर के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से संबंधित 21 साल पुराने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि जब कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है और विभागीय जांच में उसका प्रमाण-पत्र वैध पाया गया है, तो इतने लंबे अंतराल के बाद हाई पावर कमेटी से जांच कराने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। कोर्ट ने 2005 और 2008 के संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।