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ग्वालियर: जीआरएमसी में अंग प्रत्यारोपण के लिए एचएलए लैब की सुविधा मिलेगी

ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) में ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) लैब की स्थापना अंतिम चरण में है। यह लैब किडनी, लीवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट से पहले होने वाली महत्वपूर्ण एचएलए मैचिंग जाँच की सुविधा स्थानीय स्तर पर प्रदान करेगी। वर्तमान में ग्वालियर-चंबल अंचल के मरीजों को यह जाँच कराने के लिए दिल्ली या भोपाल जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों का अपव्यय होता है। इस लैब के शुरू होने से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में प्रस्तावित किडनी ट्रांसप्लांट सेवा को भी लाभ मिलेगा, जिससे जीआरएमसी मध्य भारत में ट्रांसप्लांट सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा।

ग्वालियर के JAH और GRMC के 1000 करोड़ रुपये के मास्टर प्लान को सैद्धांतिक मंजूरी

ग्वालियर के जयाआरोग्य अस्पताल समूह (जेएएच) और गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के लिए 1000 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत हो गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने इस योजना को मंजूरी दी है। यह परियोजना ग्वालियर को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और शोध का केंद्र बनाएगी। दिल्ली के विशेषज्ञ और बीडीसी की टीम द्वारा तैयार इस प्लान में नए भवनों के निर्माण, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार और आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है। इससे हजारों मरीजों और मेडिकल छात्रों को लाभ मिलेगा।

एमबीबीएस छात्रों को अपग्रेड विकल्प ऑनलाइन मिलेगा

इस सत्र से गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) में एमबीबीएस की 250 सीटों पर प्रवेश होगा, जिसके लिए कॉलेज प्रशासन ने काउंसिलिंग की तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेडिकल काउंसिल कमेटी (एमसीसी) ने ऑल इंडिया कोटे के अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया आसान करते हुए अपग्रेडेशन का विकल्प ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। अब छात्रों को इसके लिए कॉलेज नहीं आना होगा। वहीं, मध्यप्रदेश में इस सत्र के लिए प्रस्तावित मेडिकल प्रवेश के नए नियम और निजी कॉलेजों में 30-35% मैनेजमेंट कोटा लागू नहीं होंगे। एनआरआई पात्रता में बदलाव भी टाले गए हैं।

ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में अगस्त अंत तक शुरू होगी सीटी स्कैन-एमआरआई सुविधा

ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई जांच सुविधा अगस्त माह के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। अस्पताल प्रशासन ने मशीनों की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी है और तकनीकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। जीआरएमसी प्रबंधन ने केबल बिछाने के लिए टेंडर जारी कर कार्यादेश भी दिए हैं। इस सुविधा से गंभीर मरीजों को अस्पताल परिसर में ही तत्काल जांच मिल सकेगी, जिससे इलाज में तेजी आएगी और उन्हें पुराने परिसर ले जाने का जोखिम कम होगा। एमआरआई मशीन की लागत लगभग 17.02 करोड़ रुपये है।

ग्वालियर जीआरएमसी में सिर में धंसी कैंची, आठ वर्षीय बालक की जटिल न्यूरोसर्जरी से बची जान

ग्वालियर के गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) में एक आठ वर्षीय बालक के सिर से सफलतापूर्वक कैंची निकाली गई, जिससे उसकी जान बच गई। मुरैना जिले के जौरा निवासी बालक के सिर में खेलते समय कैंची दुर्घटनावश धंस गई थी। स्वजन ने उसे सीधे अस्पताल पहुंचाया, जहां न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर जटिल ऑपरेशन किया। न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश शर्मा ने ऐसी स्थितियों में स्वयं वस्तु न निकालने की सलाह दी है। विभाग हर माह 500 से अधिक मरीजों का इलाज करता है और लगभग 200 जटिल ऑपरेशन करता है।