उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में एक हजार वर्ष पुराना शिव मंदिर फिर से आकार ले रहा है। वर्ष 2020-21 में खोदाई के दौरान इसके अवशेष मिले थे, जिनमें आधार भाग, गर्भगृह, शिवलिंग और कई प्रतिमाएं शामिल हैं। पुरातत्व विभाग इन अवशेषों के आधार पर भूमिज शैली में मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहा है, जिसकी ऊंचाई 36 से 37 फीट रहेगी और लागत 65 से 90 लाख रुपये अनुमानित है। यह महाकाल मंदिर के प्राचीन इतिहास को पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकाली गई। अवंतिकानाथ चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश रूप में नगर भ्रमण पर निकले। इस बार बीमार श्यामू हाथी के स्थान पर मादा हाथी सुमा ने पहली बार सवारी में भाग लिया, जिससे 46 साल से चली आ रही रामू-श्यामू हाथी परिवार की सेवा समाप्त हो गई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पूजन कर सवारी को रवाना किया। सवारी परंपरागत मार्गों से शिप्रा तट पहुंची, जहां जलाभिषेक हुआ। 5 किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर 4 घंटे तक भक्ति का उल्लास छाया रहा, जिसमें 15 से अधिक दल और 1200 जवान शामिल थे।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती से जुड़ी कई अनूठी परंपराएं हैं। भगवान महाकाल के भोग के लिए एक दिन पहले भिक्षा मांगने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी निभाई जाती है, जिसमें पुजारी परिवार द्वारा नियुक्त व्यक्ति शहर की 20 से अधिक दुकानों से सामग्री एकत्र करता है। भस्म आरती के लिए 16 अधिकृत पुजारी ही होते हैं। आरती से पूर्व मंदिर के पट आज्ञा लेकर खुलते हैं, 16 मंत्रों से अभिषेक होता है और नंदी के अभिषेक के बाद भगवान का भव्य शृंगार होता है। भस्म अर्पण के समय महिलाएं घूंघट रखती हैं। सावन में सोमवार को भगवान उपवास भी रखते हैं, और चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनती है।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्रावण मास के दूसरे सोमवार को तड़के भस्म आरती हुई, जिसमें भगवान महाकाल का दूल्हा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। प्रदोष के संयोग पर उन्हें फलाहार का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पट तड़के 2:30 बजे खोले गए, जो श्रावण मास के सामान्य समय से पहले था। पुजारी महेश गुरु ने बताया कि पूजन विधि के तहत वीर बाल भद्र, महाकाल, गणेश, कार्तिकेय और नंदी का अभिषेक किया गया। भस्म स्नान और रजत मुकुट धारण कराने के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।
श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नगरी में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के मंदिर को गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर तक कई क्विंटल सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। यह विशेष पुष्प शृंगार पूरी रात चला, जिसमें महेश्वर और उज्जैन के पंडितों और दक्ष कारीगरों ने सहयोग दिया। सोमवार सुबह मंदिर के पट खुलने पर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के अलौकिक और मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हो उठे।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास के प्रथम सप्ताह (30 जुलाई से 6 अगस्त) के दौरान 29 लाख 28 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। इस अवधि में मंदिर को शीघ्र दर्शन टिकटों से 3 करोड़ 50 लाख 57 हजार रुपये और लड्डू प्रसाद की बिक्री से लगभग 2 करोड़ 35 लाख रुपये की आय हुई। मंदिर समिति आगामी नागपंचमी, 15 अगस्त और रक्षाबंधन जैसे महापर्वों की तैयारी कर रही है। सांसद-अभिनेता मनोज तिवारी ने भी सपरिवार महाकाल दर्शन किए। मंदिर में शिशु आहार केंद्र की स्थापना भी की गई है।
श्रावण के पहले सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की भव्य सवारी निकलेगी। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यापक इंतजाम किए हैं। महाकाल की सवारी की थीम ‘वैदिक उद्घोष’ होगी, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार गूंजेंगे। वहीं, ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में दिव्य नौका विहार आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोनों तीर्थ स्थल धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों से शिवमय वातावरण में डूबे रहेंगे।
उज्जैन में सावन माह के पहले सोमवार को बाबा महाकाल की पहली सवारी धूमधाम से निकली। भगवान महाकाल ने चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर रूप में भक्तों को दर्शन दिए। पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार हर सवारी में अलग-अलग थीम होंगी और कावड़ यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। इस साल सावन में 4 और भादौ में 2 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें विभिन्न दल और व्यवस्थाएं शामिल होंगी।
इस वर्ष तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से इंदौर तक 2100 किलोमीटर की नॉनस्टॉप सीताराम डाक कावड़ यात्रा 171 घंटों में पूरी होगी। अरण्यधाम संत आश्रम के संस्थापक महामंडलेश्वर रामजी बाबा द्वारा 2015 में शुरू की गई इस परंपरा में श्रद्धालु सावन माह में महादेव का जलाभिषेक करते हैं। 10 अगस्त को इंदौर से 250-300 श्रद्धालुओं का जत्था रामेश्वरम के लिए रवाना होगा, और 15 अगस्त को वहां से यात्रा की शुरुआत होगी। यात्रा के दौरान खान-पान के लिए 25 सदस्यीय रसोइयों का दल भी साथ रहेगा, जिसमें प्रत्येक कांवड़िया 150-200 किलोमीटर की दूरी बारी-बारी से दौड़ेगा।
सावन के पहले सोमवार, 3 अगस्त को ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंगों की भव्य शाही सवारी निकलेगी। इस दौरान नर्मदा में दिव्य नौका विहार और विशेष पूजन भी होगा। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नर्मदा तट पर पंचमुखी रजत प्रतिमा का स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक और महाआरती प्रमुख आकर्षण रहेंगे। जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा व सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें वन-वे दर्शन और भारी वाहनों पर प्रतिबंध शामिल है।