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नीमच में 13 रुद्राक्षों पर 12 ज्योतिर्लिंग और पशुपतिनाथ महादेव उकेर कर शिव-राखी तैयार

नीमच के चित्रकार राहुल कुमार लोहार ने रक्षाबंधन पर एक अनोखी रुद्राक्ष शिव-राखी बनाई है। इसमें 13 रुद्राक्षों का उपयोग हुआ है, जिन पर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों और मंदसौर के अष्टमुखी पशुपतिनाथ महादेव के सूक्ष्म चित्र उकेरे गए हैं। उन्होंने छोटे रुद्राक्षों को कैनवास बनाकर बारीक ब्रश और नग्न आंखों से यह चित्रकारी की है। इस कलाकृति का उद्देश्य द्वादश ज्योतिर्लिंगों को एक सूत्र में जोड़कर भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश देना है। यह राखी कला और आस्था का अनूठा संगम है।

महाकाल मंदिर में आम भक्तों को भी मिलेगा वीआईपी प्रवेश

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में सामान्य भक्तों को भी वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल सकती है। मंदिर समिति प्रायोगिक तौर पर भीड़ कम रहने वाले समय में ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे भक्तों को लंबी कतार के बजाय छोटे मार्ग से सुगम दर्शन प्राप्त होंगे। इस पहल का उद्देश्य भक्तों को सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ स्लैक सीजन में श्रद्धालुओं का प्रवाह बढ़ाना और उज्जैन की स्थानीय अर्थव्यवस्था को वर्षभर गति देना है। योजना सफल होने पर इसे स्थायी किया जा सकता है।

महाकाल के आंगन में एक हजार वर्ष पुराना शिव मंदिर फिर ले रहा आकार

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में एक हजार वर्ष पुराना शिव मंदिर फिर से आकार ले रहा है। वर्ष 2020-21 में खोदाई के दौरान इसके अवशेष मिले थे, जिनमें आधार भाग, गर्भगृह, शिवलिंग और कई प्रतिमाएं शामिल हैं। पुरातत्व विभाग इन अवशेषों के आधार पर भूमिज शैली में मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहा है, जिसकी ऊंचाई 36 से 37 फीट रहेगी और लागत 65 से 90 लाख रुपये अनुमानित है। यह महाकाल मंदिर के प्राचीन इतिहास को पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

महाकाल सवारी: 46 साल बाद बदला हाथी, सुमा पर सवार हुए राजा

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकाली गई। अवंतिकानाथ चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश रूप में नगर भ्रमण पर निकले। इस बार बीमार श्यामू हाथी के स्थान पर मादा हाथी सुमा ने पहली बार सवारी में भाग लिया, जिससे 46 साल से चली आ रही रामू-श्यामू हाथी परिवार की सेवा समाप्त हो गई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पूजन कर सवारी को रवाना किया। सवारी परंपरागत मार्गों से शिप्रा तट पहुंची, जहां जलाभिषेक हुआ। 5 किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर 4 घंटे तक भक्ति का उल्लास छाया रहा, जिसमें 15 से अधिक दल और 1200 जवान शामिल थे।

महाकाल के भोग के लिए आज भी मांगी जाती है भिक्षा

उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती से जुड़ी कई अनूठी परंपराएं हैं। भगवान महाकाल के भोग के लिए एक दिन पहले भिक्षा मांगने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी निभाई जाती है, जिसमें पुजारी परिवार द्वारा नियुक्त व्यक्ति शहर की 20 से अधिक दुकानों से सामग्री एकत्र करता है। भस्म आरती के लिए 16 अधिकृत पुजारी ही होते हैं। आरती से पूर्व मंदिर के पट आज्ञा लेकर खुलते हैं, 16 मंत्रों से अभिषेक होता है और नंदी के अभिषेक के बाद भगवान का भव्य शृंगार होता है। भस्म अर्पण के समय महिलाएं घूंघट रखती हैं। सावन में सोमवार को भगवान उपवास भी रखते हैं, और चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनती है।

महाकाल मंदिर में श्रावण के दूसरे सोमवार को दूल्हा स्वरूप में विशेष श्रृंगार, तड़के 2:30 बजे खुले पट

उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्रावण मास के दूसरे सोमवार को तड़के भस्म आरती हुई, जिसमें भगवान महाकाल का दूल्हा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। प्रदोष के संयोग पर उन्हें फलाहार का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पट तड़के 2:30 बजे खोले गए, जो श्रावण मास के सामान्य समय से पहले था। पुजारी महेश गुरु ने बताया कि पूजन विधि के तहत वीर बाल भद्र, महाकाल, गणेश, कार्तिकेय और नंदी का अभिषेक किया गया। भस्म स्नान और रजत मुकुट धारण कराने के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया

श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नगरी में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के मंदिर को गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर तक कई क्विंटल सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। यह विशेष पुष्प शृंगार पूरी रात चला, जिसमें महेश्वर और उज्जैन के पंडितों और दक्ष कारीगरों ने सहयोग दिया। सोमवार सुबह मंदिर के पट खुलने पर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के अलौकिक और मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हो उठे।

महाकाल मंदिर: श्रावण के प्रथम सप्ताह में 29 लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन, 3.50 करोड़ से अधिक की आय

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास के प्रथम सप्ताह (30 जुलाई से 6 अगस्त) के दौरान 29 लाख 28 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। इस अवधि में मंदिर को शीघ्र दर्शन टिकटों से 3 करोड़ 50 लाख 57 हजार रुपये और लड्डू प्रसाद की बिक्री से लगभग 2 करोड़ 35 लाख रुपये की आय हुई। मंदिर समिति आगामी नागपंचमी, 15 अगस्त और रक्षाबंधन जैसे महापर्वों की तैयारी कर रही है। सांसद-अभिनेता मनोज तिवारी ने भी सपरिवार महाकाल दर्शन किए। मंदिर में शिशु आहार केंद्र की स्थापना भी की गई है।

श्रावण के पहले सोमवार को बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की सवारी निकलेगी

श्रावण के पहले सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की भव्य सवारी निकलेगी। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यापक इंतजाम किए हैं। महाकाल की सवारी की थीम ‘वैदिक उद्घोष’ होगी, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार गूंजेंगे। वहीं, ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में दिव्य नौका विहार आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोनों तीर्थ स्थल धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों से शिवमय वातावरण में डूबे रहेंगे।

उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी निकली: चंद्रमौलेश्वर रूप में दिए दर्शन

उज्जैन में सावन माह के पहले सोमवार को बाबा महाकाल की पहली सवारी धूमधाम से निकली। भगवान महाकाल ने चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर रूप में भक्तों को दर्शन दिए। पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार हर सवारी में अलग-अलग थीम होंगी और कावड़ यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। इस साल सावन में 4 और भादौ में 2 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें विभिन्न दल और व्यवस्थाएं शामिल होंगी।