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उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा नहीं हिली, प्रशासन ने कार्रवाई रोकी

मध्य प्रदेश में 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ मनाई जाएगी, जो एक विशेष धार्मिक संयोग है। चतुर्थी से 10 दिवसीय गणेशोत्सव शुरू होगा, जिसमें ब्रह्म योग में पार्थिव गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11.30 बजे है। दूसरी ओर, उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का पूरा ढांचा तोड़ने और हाइड्रोलिक क्रेन लगाने के बावजूद अंदर की प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। प्रशासन ने कार्रवाई रोक दी है, और भक्त इसे चमत्कार मानकर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, नौ दिन रहेगी नवरात्र; माता का वाहन हाथी

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर नौ दिनों तक चलेंगे, इस दौरान किसी तिथि का क्षय नहीं होगा। रविवार को चित्रा नक्षत्र में नवरात्र आरंभ होने पर माता का वाहन हाथी होगा, जिसे सुख-समृद्धि और आर्थिक प्रगति का संकेत माना जाता है। पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, यह समय वित्तीय और न्याय व्यवस्था में बदलाव ला सकता है। नवरात्र में एक अमृत सिद्धि योग, दो सर्वार्थ सिद्धि योग और दो रवि योग जैसे शुभ योग बनेंगे, जो शुभ कार्यों और खरीदारी के लिए लाभकारी माने गए हैं। अष्टमी पूजन 18 या 19 अक्टूबर को होगा, और दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। तंत्र साधना का भी विशेष महत्व है, खासकर उज्जैन में।

उज्जैन के पंडित सूर्यनारायण व्यास ने तय की थी भारत की आजादी की तारीख और समय

भारत की स्वतंत्रता की तारीख और समय का निर्धारण उज्जैन के प्रसिद्ध पंडित सूर्यनारायण व्यास ने ज्योतिषीय गणना के आधार पर किया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आग्रह पर, पंडित व्यास ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता के लिए उपयुक्त बताया और आधी रात को औपचारिक ध्वजारोहण का सुझाव दिया, जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वीकार किया। पंडित व्यास ने 1930 में ही भारत की आजादी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी कर दी थी, और पाकिस्तान के 14 अगस्त को बनने पर अस्थिरता की चेतावनी भी दी थी।

उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में हिंदू पंचांग से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

उज्जैन के प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से चार दिन पहले, 11 अगस्त को श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर मनाया गया। यह मंदिर अंग्रेजी कैलेंडर की बजाय हिंदू पंचांग के अनुसार आजादी का जश्न मनाने की प्राचीन परंपरा का पालन करता है। 1947 में देश की आजादी भी श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को हुई थी, जिसके मुहूर्त का निर्धारण उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्य नारायण व्यास ने तत्कालीन राष्ट्रीय नेतृत्व, विशेषकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद के परामर्श पर किया था। यह परंपरा 79 वर्षों से व्यास परिवार द्वारा निजी और धार्मिक स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें अब हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

30 साल बाद शनि का मीन राशि में वक्री गोचर: 138 दिनों तक राजनीति, न्यायपालिका और मौसम पर असर

करीब तीन दशक बाद शनिदेव 27 जुलाई 2026 से 11 दिसंबर 2026 तक 138 दिनों के लिए मीन राशि में वक्री होंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, शनि की यह उल्टी चाल देश की राजनीति, न्याय व्यवस्था, कृषि, श्रमजीवी वर्ग और मौसम में महत्वपूर्ण हलचल ला सकती है। ज्योतिषाचार्यों का आकलन है कि 1996 के समान इस बार भी बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। यह अवधि नए कार्य शुरू करने के बजाय पुराने कार्यों को पूरा करने और आत्ममंथन का समय है। विभिन्न राशियों पर इसके अलग-अलग प्रभाव होंगे और शुभ प्रभावों के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय सुझाए गए हैं।