भारत की स्वतंत्रता की तारीख और समय का निर्धारण उज्जैन के प्रसिद्ध पंडित सूर्यनारायण व्यास ने ज्योतिषीय गणना के आधार पर किया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आग्रह पर, पंडित व्यास ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता के लिए उपयुक्त बताया और आधी रात को औपचारिक ध्वजारोहण का सुझाव दिया, जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वीकार किया। पंडित व्यास ने 1930 में ही भारत की आजादी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी कर दी थी, और पाकिस्तान के 14 अगस्त को बनने पर अस्थिरता की चेतावनी भी दी थी।
उज्जैन के प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से चार दिन पहले, 11 अगस्त को श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर मनाया गया। यह मंदिर अंग्रेजी कैलेंडर की बजाय हिंदू पंचांग के अनुसार आजादी का जश्न मनाने की प्राचीन परंपरा का पालन करता है। 1947 में देश की आजादी भी श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को हुई थी, जिसके मुहूर्त का निर्धारण उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्य नारायण व्यास ने तत्कालीन राष्ट्रीय नेतृत्व, विशेषकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद के परामर्श पर किया था। यह परंपरा 79 वर्षों से व्यास परिवार द्वारा निजी और धार्मिक स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें अब हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
करीब तीन दशक बाद शनिदेव 27 जुलाई 2026 से 11 दिसंबर 2026 तक 138 दिनों के लिए मीन राशि में वक्री होंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, शनि की यह उल्टी चाल देश की राजनीति, न्याय व्यवस्था, कृषि, श्रमजीवी वर्ग और मौसम में महत्वपूर्ण हलचल ला सकती है। ज्योतिषाचार्यों का आकलन है कि 1996 के समान इस बार भी बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। यह अवधि नए कार्य शुरू करने के बजाय पुराने कार्यों को पूरा करने और आत्ममंथन का समय है। विभिन्न राशियों पर इसके अलग-अलग प्रभाव होंगे और शुभ प्रभावों के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय सुझाए गए हैं।