BREAKING NEWS

Latest News

पन्ना टाइगर रिजर्व में पी-141 की युवा बाघिन ‘भविष्य की रानी’ के रूप में उभर रही

पन्ना टाइगर रिजर्व में आगामी पर्यटन सीजन वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांचक रहने वाला है। बाघों की नई पीढ़ी लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है, जिसमें पी-652 के नए शावकों के बाद अब पी-141 की उप-वयस्क बेटी ने ध्यान खींचा है। इस युवा बाघिन को पन्ना की ‘भविष्य की रानी’ के रूप में देखा जा रहा है, जो जल्द ही अपना स्वतंत्र क्षेत्र स्थापित कर सकती है। पन्ना की सफल बाघ पुनर्स्थापना कहानी के कारण यह नई पीढ़ी महत्वपूर्ण है, हालांकि उसे क्षेत्र स्थापित करने और शिकार खोजने जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना होगा। पर्यटक इस पर विशेष नजर रखेंगे।

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में होमस्टे की आड़ में आलीशान रिसॉर्ट निर्माण, आईएएस अधिकारी पर आरोप

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक आलीशान रिसॉर्ट के निर्माण में नियमों की अनदेखी और शासन को गुमराह करने का आरोप है। गुरुग्राम के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार पर होमस्टे की अनुमति की आड़ में प्रतिबंधित वनभूमि पर रिसॉर्ट बनाने का आरोप है। राजगढ़ गांव के खसरा नंबर 1841 की यह भूमि वन्यजीव गलियारे का हिस्सा बताई जा रही है, जिससे वन्यजीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। वन विभाग ने निर्माण की कोई अनुमति नहीं दी थी। डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

मप्र में बाघ कॉरिडोर के पास तीसरे कोयला ब्लॉक को खनन की स्वीकृति

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और अचानकमार टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण बाघ कॉरिडोर के पास तीसरे कोयला ब्लॉक, पिथोरा ईस्ट परियोजना, को खनन के लिए पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी ने स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना का खनन पट्टा क्षेत्र एक हजार हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें 800 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है। कमेटी ने इससे पहले मरवटोला-सात और अर्जुन वेस्ट कोल ब्लॉक को भी मंजूरी दी थी, जो कॉरिडोर से क्रमशः 53 मीटर और 3.9 मीटर की दूरी पर स्थित हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आधी रात को दिखी दुर्लभ जंगल कैट

विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आधी रात को एक दुर्लभ जंगल कैट देखी गई। वर्षा से भीगी घास के बीच अपनी चमकती आंखों के साथ दिखी इस शर्मीली बिल्ली को वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर चेतन घरपुरे ने कैमरे में कैद किया। जंगल कैट अपनी एकांतप्रिय प्रकृति और शिकारी कौशल के कारण आसानी से दिखाई नहीं देती। विशेषज्ञों के अनुसार, बांधवगढ़ बाघों के अलावा अनेक दुर्लभ वन्यजीवों का भी आवास है। यह घटना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और उसके संरक्षण के महत्व को दर्शाती है।

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में अवैध रिसॉर्ट पर बंदूकधारी तैनात

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक कथित अवैध रिसॉर्ट पर बंदूकधारी निजी गार्डों की तैनाती सामने आई है। वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार और उनकी पत्नी हिमानी सरद द्वारा निर्मित इस रिसॉर्ट को वन विभाग ने अवैध घोषित किया है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगभग 15 दिन पहले रिसॉर्ट के पास ही चीतल का शिकार हुआ था, जिसने सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने कोर क्षेत्र में हथियारों की मौजूदगी पर चिंता व्यक्त की है। पन्ना टाइगर रिजर्व में 2009 में बाघविहीन होने के बाद अब 80 से अधिक बाघ हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन से चार-पांच फुट की दूरी पर हुआ सामना

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बर्ड वाचिंग के लिए निकले तीन लोगों का बाघिन से महज चार-पांच फुट की दूरी पर अचानक सामना हो गया। यह घटना पतौर परिक्षेत्र की गंजरहा बीट में हलफल नदी के किनारे हुई। शाम के समय जब वे नदी से गुजर रहे थे, तो ताजे पगमार्क देखने के बाद अचानक बाघिन सामने आ गई और दहाड़ लगाई। सब कुछ दस सेकंड में हुआ। पाँच साल बीत जाने के बाद भी यह घटना उनकी यादों में जीवंत है, जो जंगल में सतर्कता और प्रकृति के सम्मान का संदेश देती है।

मध्य प्रदेश में 785 बाघ, ‘पुजारी’ और ‘मौसी मां’ जैसे अनोखे नामों से पहचान

मध्य प्रदेश ने बाघ संरक्षण में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिससे राज्य में बाघों की संख्या बढ़कर 785 हो गई है। पारंपरिक जंगल छोटे पड़ने लगे हैं और बाघ नए इलाकों में भी देखे जा रहे हैं। बाघों को ‘पुजारी’, ‘मिस्टर इंडिया’ और ‘मौसी मां’ जैसे अनोखे नाम दिए गए हैं, जो पर्यटकों के बीच उनकी पहचान बढ़ाते हैं। मां से बिछड़े शावकों को जंगल में दोबारा बसाने का ‘रिवाइल्ड’ मॉडल सफल रहा है, जिससे 20 से अधिक शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। दो नए टाइगर रिजर्व भी बनाए गए हैं और निगरानी बढ़ाई गई है।