संसदीय समिति ने पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए एक अलग ‘सपोर्ट सेल’ बनाने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि ऐसे उद्यमियों को बड़े औद्योगिक घरानों के समान सरकारी सुविधाओं तक आसान पहुंच मिलनी चाहिए। इसके लिए डिजिटल सिंगल-विंडो व्यवस्था को मजबूत करने, फास्ट-ट्रैक सुविधा देने और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, ताकि उद्यमी विभिन्न सरकारी दफ्तरों के बजाय एक ही प्लेटफॉर्म से सभी आवश्यक काम पूरे कर सकें।
भोपाल शहर और 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के भू-अभिलेख अगले तीन महीनों में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे लोगों को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिला प्रशासन ने डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें स्कैनिंग, मेटाडेटा तैयार करना और पटवारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन शामिल है। सभी रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) ने 1970 से 2024 तक के 52 कोर्स की 1.38 करोड़ मार्कशीट का रिकॉर्ड डिजिटल कर दिया है, जिससे यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। इस पहल से विद्यार्थियों को डुप्लीकेट मार्कशीट 2-3 दिन में और आपात स्थिति में 24 घंटे में मिल सकेगी। 10 सदस्यीय टीम ने सवा साल तक 23 लाख टेबुलेशन चार्ट स्कैन किए। यह अभियान 31 जुलाई 2026 को पूरा हुआ, जिसका उद्देश्य रिकॉर्ड सुरक्षा और त्वरित सेवा प्रदान करना है। कंपनियों के लिए भी मार्कशीट सत्यापन अब 24 घंटे में संभव होगा, जो पहले सप्ताहों से महीनों लेता था।