जबलपुर में साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक वृद्ध दंपती, प्रकाश पॉल शेजवाल (75) और उनकी पत्नी डोरा शेजवाल, से 22 लाख रुपये की ठगी की। ठगों ने दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स केस में फंसाने का झांसा दिया और छह दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान, 21 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर आरटीजीएस के माध्यम से और 98,999 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए। पीड़ित ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस आरोपितों की पहचान में जुटी है।
खंडवा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर अपराधियों ने श्रवण कुमार नामक व्यक्ति से 3 लाख 4 हजार 999 रुपये की ठगी की। आरोपितों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें गंभीर मामलों में फंसाने का डर दिखाया और लगभग 15 दिन तक मानसिक दबाव में रखा। ठगी के बाद अपराधियों ने पीड़ित को स्वयं ही थाने भेज दिया, जहां उन्हें पता चला कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच की और झाबुआ निवासी आकाश उर्फ हावसिंह भूरिया को गिरफ्तार किया। इस ठगी में दो अन्य आरोपित भी शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है।
मुंबई में साइबर ठगों ने एक 90 वर्षीय बुजुर्ग को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 1.57 करोड़ रुपये ठग लिए। ठगों ने स्वयं को दूरसंचार विभाग और मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया, फर्जी नोटिस और वेबसाइट दिखाई। सात महीने तक चले इस मानसिक दबाव के बाद बुजुर्ग ने अपनी जमा पूंजी गंवा दी। उन्हें ठगी का अहसास तब हुआ जब उन्होंने अखबार में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी खबर पढ़ी। नवी मुंबई साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।