जबलपुर में दो लोगों को गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजना भारी पड़ा। साइबर ठगों ने डॉक्टर बनकर लिंक भेजकर उनके मोबाइल की मिररिंग कर ली और बैंक खातों से कुल 82,594 रुपये उड़ा लिए। गोरखपुर थाना क्षेत्र की सपना विश्वकर्मा ने 32,595 रुपये गंवाए, जबकि भेड़ाघाट थाना क्षेत्र के कालूराम साहू के खाते से 49,999 रुपये निकाल लिए गए। कालूराम ने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, और गोरखपुर तथा भेड़ाघाट पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
उज्जैन में आयोजित ‘भारतीय दृष्टि में Gen Z’ व्याख्यान में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने विकसित भारत के लिए Gen Z को भारतीय संस्कारों और नवाचार का संगम अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और एआई के युग में युवाओं को अपनी आधुनिक सोच भारतीय मूल्यों से जोड़नी होगी। स्वामी जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर देते हुए युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और डिजिटल युग में जिम्मेदारी बरतने की सलाह दी। रोहित कुमार सिंह ने युवा ऊर्जा को राष्ट्रहित में लगाने का आह्वान किया।
साइबर ठगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बचने के लिए एक नई ‘कैश-आउट गैंग’ बनाई है। यह गिरोह हर बड़े शहर में कमीशन एजेंट तैनात करता है, जो ठगी की रकम बैंक खाते में आते ही कुछ ही मिनटों में एटीएम से निकाल लेते हैं। इसके बाद यह रकम कैश डिपोजिट मशीन के जरिए सरगनाओं तक पहुंचा दी जाती है, जिससे पीड़ित के शिकायत करने से पहले ही खाते खाली हो जाते हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे ऑपरेशन को तीन राज्यों में बांटा जाता है, जिससे नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कोहेफिजा पुलिस की जांच में इस देशव्यापी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
भोपाल के न्यू मार्केट के ज्वेलर अनु एकांश अग्रवाल से क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर 1.20 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। शास्त्री नगर निवासी अग्रवाल ने एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के लिए बैंक से संपर्क किया था। 31 जुलाई को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें ठग ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर ओटीपी मांगा। ओटीपी साझा करते ही उनके खाते से 1.20 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन हो गया। पीड़ित ने तुरंत कार्ड ब्लॉक कराकर साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
ग्वालियर में साइबर ठगों ने एक बैंक कर्मचारी, कमल किशोर शर्मा, के आधार को लॉक कर ई-सिम जारी करके उसके क्रेडिट कार्ड से 64 हजार रुपये की ठगी की। मई में उन्हें ई-चालान के नाम से एक एपीके फाइल भेजी गई थी, जिसके बाद उन्होंने बैंक खाता ब्लॉक कराया। हालांकि, उनकी पुरानी सिम बंद होने और नई ई-सिम जारी होने के बाद उनके क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी हुई। बैंक द्वारा नया कार्ड जारी करने के बावजूद, उससे 64 हजार रुपये निकाल लिए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आयकर रिटर्न दाखिल करने के सीजन में साइबर अपराधियों ने वॉट्सएप पर फर्जी आयकर नोटिस भेजकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया है। ये नोटिस पैन कार्ड ब्लॉक होने या आयकर रिफंड लंबित होने का दावा करते हैं और 24 घंटे में बैंक खाता फ्रीज करने की धमकी देते हैं। ठग लिंक या जिप फाइल भेजकर गोपनीय जानकारी चुराते हैं। भोपाल क्राइम ब्रांच ने एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि आयकर विभाग वॉट्सएप का उपयोग नहीं करता और कभी भी ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगता। संदिग्ध संदेशों को हटाने और आधिकारिक पोर्टल पर जानकारी सत्यापित करने की सलाह दी गई है।
शहर में साइबर ठगों ने लोगों को फंसाने के लिए नए तरीके अपनाए हैं, जिससे पांच अलग-अलग मामलों में करीब 13 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई है। सबसे बड़ा मामला ऐशबाग की 41 वर्षीय शाजिया खान के साथ हुआ, जिनसे एम्स्टर्डम की महिला बनकर दोस्ती करने के बाद क्रिसमस गिफ्ट, पार्सल में डॉलर और ड्रग्स केस में फंसाने का डर दिखाकर 8.35 लाख रुपए ऐंठे गए। अन्य मामलों में बिजली बिल अपडेट, फोनपे और एक्सिस बैंक खाते की गारंटी खत्म होने का झांसा देकर लाखों की ठगी की गई। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है।
हैदराबाद पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फर्जी और एआई-जनरेटेड वीडियो वायरल होने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद प्रसारित एआई-मॉर्फ्ड वीडियो के संदर्भ में की गई है। पुलिस इन फर्जी वीडियो को अपलोड करने वाले, प्रसारित करने वाले और उनके पीछे के इरादे की जांच कर रही है, साथ ही भारतीय न्याय संहिता और आईटी अधिनियम के उल्लंघन की भी पड़ताल की जा रही है।
ग्वालियर में ग्रामीण उद्यानिकी विकास अधिकारी सुरेंद्र द्विवेदी 2.25 लाख रुपये की साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। ठगों ने एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड की अनुपयोगी सर्विस बंद करने का झांसा देकर उनसे ओटीपी पूछा और उनके खाते से रुपये निकाल लिए। 1 जुलाई को आए इस कॉल में ठग ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया और पीड़ित को उनके कार्ड की सही जानकारी देकर विश्वास में लिया। इस संबंध में यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसके बाद पुलिस ने शनिवार को मूल एफआईआर दर्ज की।
नोएडा में साइबर जालसाजों ने एक 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 18.50 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को एयरटेल कर्मचारी और महाराष्ट्र पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार मानसिक दबाव में रहीं डॉक्टर ने भयभीत होकर अपनी एफडी तुड़वाकर पूरी रकम दो बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए भेज दी। साइबर विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, सीमित जानकारी और अकेलेपन के कारण बुजुर्ग आसानी से ऐसे ठगों का निशाना बन जाते हैं।