इंटरनेट मीडिया का बढ़ता उपयोग किशोरों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। इसके एल्गोरिदम लगातार एक जैसा कंटेंट परोस रहे हैं, जिससे उनमें बेचैनी, उदासी और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। मनोचिकित्सकों के पास ऐसे मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। बच्चों में अश्लील कंटेंट से ओसीडी और आक्रामक कंटेंट से आक्रामकता जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञ अभिभावकों को बच्चों के कंटेंट पर ध्यान देने और उनसे खुलकर बात करने की सलाह दे रहे हैं, ताकि समस्याओं का समय रहते समाधान हो सके।
मध्य प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए एक नई योजना शुरू की है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों में सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध न होने पर उन्हें निजी सेंटरों में मुफ्त सोनोग्राफी की सुविधा मिलेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जारी निर्देशों के अनुसार, इसका पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। यह व्यवस्था डिजिटल और कैशलेस होगी, जिसमें ई-वाउचर प्रणाली, ओडीके ऐप पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग और सुमन यूएसजी पोर्टल के माध्यम से निजी सेंटरों को प्रति केस 500 रुपये का भुगतान शामिल है। इस पहल का उद्देश्य मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करना है।