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ग्वालियर में झमाझम वर्षा से नदियां और बांध लबालब, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

ग्वालियर में रविवार को हुई झमाझम वर्षा से शहर और गांवों में जलभराव की स्थिति बनी। पिछले तीन दिन की वर्षा से जिले की नदियां उफान पर हैं और पही, ककेटा तथा तिघरा बांध लबालब भर गए, जिससे शहर का जल संकट हल हो गया। प्रशासन ने नदियों के किनारे बसे गांवों को बांधों से पानी छोड़े जाने की संभावना पर अलर्ट किया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, निम्न दाब का क्षेत्र अब आगरा की ओर खिसक गया है, जिससे आगामी चार दिनों तक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। वर्षा से तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम हुआ है और खरीफ व रबी फसलों को लाभ मिला है।

ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस, 19 सितंबर से मानसून वापसी संभव

ग्वालियर में वर्षा का सिस्टम सक्रिय होने के बावजूद सोमवार को केवल बादल छाए रहे, जिससे अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 32.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की संभावना जताई है। शहर में हल्की वर्षा के आसार बने हुए हैं, जबकि अगले 24 घंटों के दौरान गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वर्तमान में कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उत्तरी गुजरात पर केंद्रित है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 अक्टूबर तक बारिश की संभावना

प्रदेश में मंगलवार को मौसम शुष्क रहा, जिसके परिणामस्वरूप दिन के तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई और कई जिलों में उमस महसूस की गई। मौसम विज्ञानी अभिजीत चक्रवर्ती के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश पर बने चक्रवाती हवाओं के घेरे और उत्तर हरियाणा में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण होगा।

मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई: सामान्य से चार प्रतिशत कम बारिश, पूर्वी हिस्से में फिर बारिश के आसार

मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई हो गई है, जिसके बाद रातें ठंडी और दिन गर्म होने लगे हैं। पूरे सीजन में 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से चार प्रतिशत कम रही। मौसम विभाग ने 7 और 8 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के 14 जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है। पिछली तीन रातों में कई शहरों के न्यूनतम तापमान में गिरावट आई है, जबकि दिन में तेज धूप से गर्मी महसूस हो रही है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखा गया है, जिसमें जून महीने की कमी मुख्य कारण रही।

बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र बना, 15 अगस्त से मध्य प्रदेश में फिर होगी तेज वर्षा

मध्य प्रदेश में तीन मौसम प्रणालियों के कारण अधिकांश जिलों में वर्षा जारी है। बुधवार को वर्षा में थोड़ी कमी देखी गई, हालांकि सीहोर में सर्वाधिक 43 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए श्योपुर और शिवपुरी में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। लगातार वर्षा से दिन के तापमान में गिरावट आई है। इस बीच, बुधवार को बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बन गया है, जिसका प्रभाव 15 अगस्त से राज्य में दिखेगा और तेज वर्षा का नया दौर शुरू होगा।

जबलपुर समेत संभाग के जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 20 अगस्त तक जारी रहेगा सिलसिला

जबलपुर और संभाग के जिलों में मानसून फिर सक्रिय हो गया है, शनिवार रात से शुरू हुई बारिश रविवार को भी जारी रही। मौसम विभाग ने 20 अगस्त तक हल्की से भारी बारिश का अनुमान जताया है। उत्तर ओडिशा पर बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसून ट्रफ के सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। रविवार को 7 मिमी बारिश के साथ कुल मानसून वर्षा 346 मिमी दर्ज हुई, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है। शहर के कई इलाकों में जलभराव और कीचड़ से आवागमन प्रभावित हुआ। पिछले दो दिनों में अधिकतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है।

सागर जिले में सामान्य से 63 प्रतिशत कम बारिश; बीना में पौने 4 इंच वर्षा दर्ज

सागर जिले में अब तक सामान्य से 63 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जहां इस सीजन में कुल 455 मिमी (17.9 इंच) वर्षा हुई है, जबकि सामान्य बारिश 1230.5 मिमी है। पिछले 24 घंटों में बीना में पौने 4 इंच और राहतगढ़ में 3 इंच बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऊपर से गुजर रही ट्रफ लाइन और पश्चिम बंगाल पर बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण आगामी दिनों में तेज बारिश की संभावना है। पिछले साल 10 अगस्त तक 32.3 इंच बारिश हुई थी, जो इस वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक थी।

इंदौर में रात से लगातार बारिश, तापमान गिरा, फसलों को मिली संजीवनी

इंदौर शहर में रविवार रात से लगातार बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और मौसम में ठंडक बढ़ी है। इस वर्षा से निचले इलाकों में जलजमाव और स्कूलों में कम उपस्थिति देखी गई। कृषि विशेषज्ञों ने इसे धान और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए लाभकारी बताया है, जिन्हें पिछले 15 दिनों से बारिश की कमी का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, इंदौर को अभी भी औसत वार्षिक वर्षा कोटा पूरा करने के लिए लगभग 22 इंच बारिश की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश में भी अब तक औसतन 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है, और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश का अनुमान जताया है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में मानसूनी बारिश का सिलसिला टूटने की संभावना

जबलपुर सहित महाकोशल अंचल में दो दिन की अच्छी बारिश से नदी, नाले और बांधों का जलस्तर बढ़ा है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून प्रणालियों का रुख बदलने से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का सिलसिला टूट सकता है, हालांकि हल्की बारिश जारी रहेगी। सोमवार को जबलपुर में 2.1 मिमी बारिश दर्ज हुई, अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री रहा। आगामी दिनों के लिए जबलपुर, कटनी और मंडला के तापमान का पूर्वानुमान जारी किया गया है। साथ ही, जबलपुर में महिला समूहों से 25.44 लाख रुपये की वसूली का मामला भी सामने आया है।

मानसूनी प्रणालियाँ पूर्वी मध्य प्रदेश से पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर सरकीं, तेज बारिश के आसार कम

मानसूनी प्रणालियां पूर्वी मध्य प्रदेश से पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर सरक गई हैं, जिससे जबलपुर संभाग में तेज बारिश की संभावना कम हो गई है। उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जिससे हल्की बारिश और कहीं-कहीं तेज बौछारें पड़ सकती हैं। 14 अगस्त के बाद भारी बारिश के संकेत हैं। जबलपुर में मंगलवार को अधिकतम तापमान 27.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस बीच, सांदीपनी विद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने स्कूल को 10 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने के विरोध में जबलपुर-दमोह-भोपाल रोड जाम कर दिया।