इंदौर के पीपल्याहाना तालाब का पानी हरा पड़ने लगा है और उसमें काई जम रही है, जिससे गंदगी मिलने की आशंका बढ़ गई है। यह तालाब आसपास के क्षेत्र में भूजल रिचार्जिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इसके दूषित पानी से जमीन में पहुंचने वाले पानी के भी दूषित होने का खतरा है। नगर निगम द्वारा स्टॉर्म वाटर लाइन से पानी छोड़े जाने के बावजूद, पानी का हरा होना गंदगी के प्रवेश का संकेत दे रहा है। ई-कोलाई सहित अन्य बैक्टीरिया भूजल में पहुंचकर उसे दूषित कर सकते हैं, जैसा कि पूर्व में इंदौर के बोरिंग पानी में पाया गया था, जिसका सेवन जानलेवा हो सकता है।
सीहोर जिले में अगस्त का पहला सप्ताह शुरू होने के बावजूद मानसून उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। 3 अगस्त तक जिले में औसतन 20.03 इंच (508.7 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 5.41 इंच (138.4 मिमी) कम है। इस स्थिति का सीधा असर जिले की जल संरचनाओं पर पड़ा है, जहां 66 प्रमुख तालाबों में से 27 अभी भी पूरी तरह सूखे हैं और शेष भी अपनी क्षमता से काफी कम भरे हैं। विशेषज्ञों ने आगामी दिनों में अच्छी बारिश न होने पर पेयजल और सिंचाई संकट गहराने की चेतावनी दी है।
इंदौर में जुलाई माह में पर्याप्त बारिश के बावजूद शहर के तालाबों का जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ा है। शहर की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर में अभी 12 फीट पानी है, जबकि इसकी क्षमता 19 फीट है और यह अभी भी 7 फीट खाली है। पिछले साल जुलाई में यह तालाब लबालब था। अन्य तालाब जैसे बिलावली और लिंबोदी भी बायपास निर्माण के कारण चैनलों के अवरुद्ध होने से धीमी गति से भर रहे हैं, जिससे भूजल स्तर पर असर पड़ रहा है। तालाबों को पूरी तरह भरने में अगस्त माह का समय लग सकता है।