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नेहा भट्ट ने कृत्रिम पैर के सहारे अमरनाथ और केदारनाथ यात्रा पूरी की

अहमदाबाद की नेहा भट्ट ने 2021 में एक दर्दनाक हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था, लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। कृत्रिम पैर के सहारे उन्होंने सात ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ बाबा बर्फानी अमरनाथ और केदारनाथ की कठिन यात्राएं पूरी कीं। नेहा ने 2025 में 22 किलोमीटर की केदारनाथ यात्रा और 2026 में 18 किलोमीटर की अमरनाथ यात्रा पैदल चलकर संपन्न की। बाबा महाकाल में उनकी अटूट आस्था है, जिसने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

न्याय व्यवस्था में दिव्यांगों के लिए समावेशी मॉडल; ब्रेल लिपि में मिलेगी कानूनी जानकारी

इंदौर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) द्वारा आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में दिव्यांगों के लिए न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया गया। इस दौरान दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में कानूनी जानकारी वाली विशेष गाइड ‘स्पर्श’ का विमोचन हुआ। मूक-बधिर प्रतिभागियों के लिए कार्यक्रम का लाइव भारतीय सांकेतिक भाषा में अनुवाद किया गया, और NALSA का थीम सॉन्ग भी सांकेतिक भाषा में जारी हुआ।

खाचरौद में दिव्यांग दंपती से मारपीट: FIR के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहे, कलेक्टर से सुरक्षा मांगी

उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील के बेहलोला गांव में 18 जुलाई को एक दिव्यांग दंपती के साथ मारपीट हुई। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, जिससे पीड़ित दंपती ने न्याय के लिए उज्जैन कलेक्टर से गुहार लगाई। दंपती ने आरोप लगाया कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उन पर राजीनामा का दबाव बना रहे हैं। यह विवाद पांच बीघा पैतृक जमीन के बंटवारे को लेकर है, जिसमें उनके देवर और अन्य रिश्तेदार उन्हें खेती करने से रोक रहे हैं। पीड़ितों ने अपनी जान को खतरा बताते हुए परिवार की सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जबलपुर के हिमांशु सोनी डिप्टी कलेक्टर चयनित, दिव्यांग कोटे में पहली रैंक

जबलपुर के हिमांशु सोनी ने MPPSC 2024 परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल किया है। उन्होंने दिव्यांग कोटे में पहली रैंक और सामान्य मेरिट लिस्ट में 13वीं रैंक प्राप्त की। गंभीर चोट के बावजूद, हिमांशु ने 28 अगस्त को इंदौर में अपना साक्षात्कार एंबुलेंस से पहुंचकर दिया था। वह पहले भी MPPSC 2022 परीक्षा पास कर चुके थे, लेकिन उनका लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनना था। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और आत्मविश्वास को दिया, विशेषकर अपने सेवानिवृत्त शिक्षक माता-पिता को। हिमांशु ने कहा कि दिव्यांगता सफलता में बाधा नहीं बन सकती।