श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही श्री महाकालेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि श्रावण सोमवार व्रत से पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य मिलता है। शाम 5 बजे जलाभिषेक बंद होने के बाद बाबा महाकाल राजा स्वरूप में दर्शन देते हैं। शाम 7 बजे संध्या आरती में दूध का भोग लगता है, जबकि रात 10:20 बजे शयन आरती में मेवे का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिर के पट इसके बाद बंद होते हैं। एक से एक लाख बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष धार्मिक महत्व है। माता सती और पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण व्रत किए थे।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने उज्जैन के सप्तसागरों की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई है। अधिकरण के अनुसार, गोवर्धन सागर, विष्णु सागर, पुरुषोत्तम सागर, क्षीर सागर, रुद्र सागर और पुष्कर सागर सहित छह सागरों का पानी स्नान योग्य नहीं है, फिर भी श्रद्धालु इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कर रहे हैं। एनजीटी ने इसे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और आस्था से सीधा खिलवाड़ बताया।
जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज का रविवार को इंदौर में मंगल प्रवेश हुआ। उनका चार माह का चातुर्मास प्रवास दलालबाग में रहेगा। इस चातुर्मास के लिए दलालबाग में स्थापित मंगल कलश की बोली 53 करोड़ रुपये तक पहुंची। चातुर्मास जैन धर्म का एक विशेष आध्यात्मिक पर्व है, जहां श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों और सेवा कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। मुनिश्री सुधासागर महाराज के इंदौर में चातुर्मास को लेकर समाजजनों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। उनके मंगल प्रवेश पर हजारों की संख्या में समाजजन एकत्र हुए थे।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध अर्पण के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि धार्मिक अनुष्ठानों में दूध अर्पित करने पर रोक लगाने वाला कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। हालांकि, एनजीटी ने इसे पर्यावरणीय दृष्टि से अनुचित माना और भविष्य में ऐसे आयोजनों पर विशेष निगरानी तथा एहतियात बरतने के निर्देश दिए। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की रिपोर्ट में नर्मदा की जल गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया, लेकिन बड़ी मात्रा में दूध प्रवाहित करना पर्यावरण के लिए उचित नहीं माना गया।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने नदियों में दूध अर्पित करने को आस्था का विषय बताया है और इस पर प्रतिबंध से इनकार किया। हालांकि, एनजीटी ने चेतावनी दी कि हजारों लीटर दूध प्रवाहित करने से जल पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है, इसलिए आस्था और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन आवश्यक है। यह आदेश सीहोर जिले में नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध बहाने की घटना के बाद आया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में तत्काल गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए, लेकिन विशेषज्ञों ने भविष्य में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ने से जलीय जीवों को खतरे की आशंका जताई।