सावन के दूसरे सोमवार को ग्वालियर के शिवालय ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठे। प्राचीन कोटेश्वर महादेव मंदिर में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने लंबी कतारों में लगकर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक किया। भक्तों ने भोलेनाथ को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सिंधिया राजवंश से जुड़े इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है, जिसके कारण सावन माह में ग्वालियर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर में संस्कार कांवड़ यात्रा में भाग लिया, जहां उन्होंने पूज्य दादा गुरु के साथ कांवड़ उठाई और श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन और सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही देवस्थलों के विकास और कांवड़ यात्रियों को सुविधाएं प्रदान करने पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने संतों की तपस्या और सनातन संस्कृति की जड़ों पर प्रकाश डाला, तथा मां नर्मदा के महत्व का उल्लेख करते हुए सभी को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। जबलपुर के बरगी बांध का जलस्तर भी तीन मीटर बढ़कर 417 मीटर तक पहुंचा है।
नीमच जिले के जावद नगर में अच्छी वर्षा और जल संकट से राहत के लिए सदियों पुरानी परंपराओं का आयोजन किया गया। नगर के खोर दरवाजा स्थित रामलीला मैदान में प्राचीन घास भैरव का पूजन कर गधे को गुलाब जामुन खिलाए गए। इसके बाद नगर पटेल को गधे पर सवार कर पारंपरिक सवारी निकाली गई, जिसमें लोगों ने इंद्र देव से अच्छी वर्षा की प्रार्थना की। स्थानीय मान्यता है कि इन अनुष्ठानों से इंद्र देव प्रसन्न होते हैं। इसी क्रम में किसान परिवारों की महिलाओं ने ‘पानी बंधान’ अनुष्ठान कर ढोल की थाप पर मटकियां फोड़ते हुए ‘राधे कृष्ण गोविंदा, जल बरसा दे गोविंदा’ का जाप किया।
जबलपुर में लगभग एक सप्ताह बाद मौसमी प्रणालियां फिर सक्रिय हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप मंगलवार को जिले में खंड-खंड बारिश हुई। हालांकि, इस मानसून सीजन में अब तक केवल 324.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो गत वर्ष की तुलना में 447 मिमी कम है और औसत से काफी पीछे है। बारिश की कमी और संभावित जल संकट के मद्देनजर, अखिल भारतीय गायत्री परिवार ट्रस्ट, जबलपुर छह और सात अगस्त को पर्याप्त वर्षा के लिए वरुण गायत्री जप एवं यज्ञ का आयोजन करेगा।
श्रावण के पहले सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की भव्य सवारी निकलेगी। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यापक इंतजाम किए हैं। महाकाल की सवारी की थीम ‘वैदिक उद्घोष’ होगी, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार गूंजेंगे। वहीं, ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में दिव्य नौका विहार आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोनों तीर्थ स्थल धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों से शिवमय वातावरण में डूबे रहेंगे।
उज्जैन में श्रावण-भाद्रपद मास की पहली महाकालेश्वर सवारी सोमवार को निकाली गई। भगवान महाकाल ने चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण किया, जिसमें 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह सवारी ‘वैदिक उद्घोष’ थीम पर आधारित थी, जिसे कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने दोपहर 3:30 बजे रवाना किया। 5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर झांझ-डमरू, भजन मंडलियों और पुष्पवर्षा से उत्सव का माहौल रहा। सुरक्षा के लिए 1200 से अधिक पुलिसकर्मी, 500 से अधिक वालंटियर्स और 5 ड्रोन तैनात किए गए थे। यातायात को सुचारु रखने हेतु विशेष डायवर्जन और पार्किंग प्लान लागू किया गया था।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में बुधवार से श्रावण-भाद्रपद महापर्व का शुभारंभ होगा। परंपरा अनुसार रात तीन बजे मंदिर के पट खुलेंगे, जिसके बाद श्रावण मास की पहली भस्म आरती संपन्न होगी। यह महापर्व अगले 40 दिनों तक चलेगा, जिसमें 30 जुलाई से 7 सितंबर तक प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। मंदिर प्रशासन ने कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं, जिसमें प्रतिदिन करीब 19 घंटे दर्शन उपलब्ध होंगे। सामान्य, शीघ्र और वीआईपी दर्शन के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार तथा पाँच आरती में चलायमान दर्शन की व्यवस्था की गई है।