सांची में भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों, सारिपुत्र और महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलशों के वर्षभर दर्शन कराने की तैयारी हो रही है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार ने महाबोधि सोसाइटी आफ श्रीलंका एंड सांची और रायसेन जिला प्रशासन को इस संबंध में प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में इन अस्थि कलशों के दर्शन वर्ष में केवल दो दिन होते हैं। महाबोधि सोसाइटी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है, जबकि जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। ये अस्थि कलश 1952 से सांची के चेतियागिरी बौद्ध विहार में रखे हैं।
लगातार वर्षा और कोहरे के कारण ऐतिहासिक पर्यटन नगरी मांडू की सुंदरता अपने चरम पर है। शनिवार को हजारों सैलानियों ने मांडू की ऐतिहासिक इमारतों का दीदार किया। तेज वर्षा से झरने बहने लगे हैं, बादल जमीन पर उतर आए हैं और घाट क्षेत्र में दृश्यता कम हो गई है। पर्यटक वाहनों की हेडलाइट जलाकर घूमते दिखे। मित्रता दिवस पर भी बड़ी संख्या में दोस्त मांडू पहुंचे। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण पार्किंग, शौचालय और ट्रैफिक के बेहतर इंतजाम की मांग उठ रही है। श्रावण मास में ‘बोल बम’ के जयकारों के साथ कांवड़ियों और पर्यटकों का संगम मांडू के पर्यटन को एक अनूठा अनुभव दे रहा है।