अहमदाबाद की नेहा भट्ट ने 2021 में एक दर्दनाक हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था, लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। कृत्रिम पैर के सहारे उन्होंने सात ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ बाबा बर्फानी अमरनाथ और केदारनाथ की कठिन यात्राएं पूरी कीं। नेहा ने 2025 में 22 किलोमीटर की केदारनाथ यात्रा और 2026 में 18 किलोमीटर की अमरनाथ यात्रा पैदल चलकर संपन्न की। बाबा महाकाल में उनकी अटूट आस्था है, जिसने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
जबलपुर में सोमवार को मां नर्मदा के गौरीघाट से कैलाशधाम तक 33 किलोमीटर लंबी 16वीं संस्कार कांवड़ यात्रा निकली। मुख्यमंत्री मोहन यादव दोपहर करीब 12 बजे यात्रा में शामिल होकर पैदल चलेंगे। इस यात्रा में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी अपेक्षित है, जिसके चलते जबलपुर शहर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। यात्रा भक्ति, उल्लास और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, जिसमें कांवड़ियों ने नर्मदा जल के साथ पौधे भी ले जाए। शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और यातायात मार्ग परिवर्तित किए गए हैं।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकाली गई। अवंतिकानाथ चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश रूप में नगर भ्रमण पर निकले। इस बार बीमार श्यामू हाथी के स्थान पर मादा हाथी सुमा ने पहली बार सवारी में भाग लिया, जिससे 46 साल से चली आ रही रामू-श्यामू हाथी परिवार की सेवा समाप्त हो गई। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पूजन कर सवारी को रवाना किया। सवारी परंपरागत मार्गों से शिप्रा तट पहुंची, जहां जलाभिषेक हुआ। 5 किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर 4 घंटे तक भक्ति का उल्लास छाया रहा, जिसमें 15 से अधिक दल और 1200 जवान शामिल थे।
शनिवार सुबह बमनाला से त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए एक अनूठी ‘डाक कांवड़’ यात्रा रवाना हुई, जिसमें 150 से अधिक कांवड़िए शामिल थे। ये शिवभक्त 400 किलोमीटर का सफर 36 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य लेकर निकले हैं। यात्रा में 30 बाइक सहित 40 वाहन शामिल हैं। पिछले 14 वर्षों से आयोजित हो रही यह यात्रा अब क्षेत्र की धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन चुकी है। खरगोन शहर में श्रद्धालुओं द्वारा कांवड़ियों का भव्य स्वागत किया गया। कांवड़ियों ने त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करने का संकल्प लिया है, और उनका मानना है कि भगवान शिव की भक्ति उन्हें यह चुनौती पूरी करने की शक्ति देगी।
धार जिले में बदनावर-उज्जैन फोरलेन पर रविवार दोपहर लगभग 1 बजे एक भीषण सड़क हादसे में छह युवकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। ये युवक उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर गुजरात लौट रहे थे। रॉन्ग साइड से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रॉले ने उनकी ईको वैन को जोरदार टक्कर मारी, जिससे वैन के परखच्चे उड़ गए। हादसे में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। सभी मृतक गुजरात के वडोदरा के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है और आगे की कार्रवाई जारी है।
ओंकारेश्वर के गणेश नगर बस स्टैंड से शनिवार को ‘जय हिंदू राष्ट्र कांवड़ यात्रा’ का शुभारंभ हुआ। हजारों कांवड़िए नर्मदा जल लेकर खंडवा के लिए रवाना हुए। यात्रा शुरू होने से पहले भगवा ध्वज का पूजन और श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। महादेवगढ़ मंदिर के पुजारी पंडित अश्विन खेड़े ने पाठ संपन्न कराया। संतों ने कांवड़ियों को आशीर्वाद दिया। महादेवगढ़ मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल ने भारत को शीघ्र हिंदू राष्ट्र बनाने का आह्वान किया। यात्रा में एक लीटर से 501 लीटर तक की विशेष रूप से श्रृंगारित कांवड़ें शामिल हैं, जो आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
उज्जैन में श्रावण मास के दौरान धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जहाँ प्रतिदिन 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। महाकाल लोक बनने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ गई है, जिससे शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। होटल, परिवहन, फूल-प्रसाद विक्रेता और छोटे कारोबारियों सहित हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है। प्रशासन लाखों श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं की विशेष व्यवस्थाएँ कर रहा है, जो सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए एक मॉडल का काम भी कर रहा है।
उज्जैन में सावन माह के पहले सोमवार को बाबा महाकाल की पहली सवारी धूमधाम से निकली। भगवान महाकाल ने चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर रूप में भक्तों को दर्शन दिए। पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार हर सवारी में अलग-अलग थीम होंगी और कावड़ यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। इस साल सावन में 4 और भादौ में 2 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें विभिन्न दल और व्यवस्थाएं शामिल होंगी।
इस वर्ष तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से इंदौर तक 2100 किलोमीटर की नॉनस्टॉप सीताराम डाक कावड़ यात्रा 171 घंटों में पूरी होगी। अरण्यधाम संत आश्रम के संस्थापक महामंडलेश्वर रामजी बाबा द्वारा 2015 में शुरू की गई इस परंपरा में श्रद्धालु सावन माह में महादेव का जलाभिषेक करते हैं। 10 अगस्त को इंदौर से 250-300 श्रद्धालुओं का जत्था रामेश्वरम के लिए रवाना होगा, और 15 अगस्त को वहां से यात्रा की शुरुआत होगी। यात्रा के दौरान खान-पान के लिए 25 सदस्यीय रसोइयों का दल भी साथ रहेगा, जिसमें प्रत्येक कांवड़िया 150-200 किलोमीटर की दूरी बारी-बारी से दौड़ेगा।
सावन के पहले सोमवार, 3 अगस्त को ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंगों की भव्य शाही सवारी निकलेगी। इस दौरान नर्मदा में दिव्य नौका विहार और विशेष पूजन भी होगा। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नर्मदा तट पर पंचमुखी रजत प्रतिमा का स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक और महाआरती प्रमुख आकर्षण रहेंगे। जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा व सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें वन-वे दर्शन और भारी वाहनों पर प्रतिबंध शामिल है।